एलन मस्क ने ट्विटर (Twitter) खरीदते ही पराग अग्रवाल को क्यों हटाया? 1

एलन मस्क (Elon Musk) ट्विटर (Twitter) का मालिक बनते ही ने कंपनी के तीन बड़े अधिकारियों को नौकरी से निकाल दिया। इनमें दो अधिकारी भारतीय मूल के हैं।इस कड़ी में सबसे पहले गाज गिरी है इसके टॉप अधिकारियों पर। इनमें दो प्रमुख नाम हैं पराग अग्रवाल और विजया गड्डे। पराग टि्वटर के सीईओ थे और पहली बार डील कैंसल होने के दौरान ही मस्क और उनके बीच छत्तीस का आंकड़ा बन चुका था।

हालांकि जिस तरह से मस्क ने आनन-फानन में पराग को हटाया है, उससे संकेत मिल रहे हैं कि भारत को लेकर इस सोशल मीडिया साइट का रवैया नर्म नहीं रहने वाला है। इसकी वजह है, भारत सरकार द्वारा एलन मस्क के कुछ ड्रीम प्रोजेक्ट्स को ग्रीन सिग्नल न देना। नौकरी से निकाले गए तीनों अधिकारियों को एलन मस्क ट्विटर (Twitter) करोड़ों रुपये का हर्जाना देंगे। एलन मस्क ने सबसे पहले पराग अग्रवाल (Parag Agrawal) को हटाया और खुद यह पोस्ट संभाल ली।

पराग अग्रवाल से क्या थी एलन मस्क की टशन :-

पराग अग्रवाल से एलन मस्क की टशन तब शुरू हुई, जब मस्क ने इसी साल अप्रैल में ट्विटर खरीदने की तरफ कदम बढ़ाया था। तभी बहुत सारे लोगों को इतना तो समझ में आ गया था टि्वटर में एंट्री के बाद कुछ ना कुछ अलग तो जरूरी करेंगे। जब मस्क ने पहली बार डील से कदम वापस खींचा तो उन्होंने आरोप लगाया था कि पराग ने उन्हें ट्विटर के फेक अकाउंट्स पर गलत जानकारी दी थी।

रिश्तों में खटास उस वक्त और बढ़ गई जब एलन मस्क ने ट्वीट किया, क्या ट्विटर मर रहा है? अमेरिकी कोर्ट में भी कुछ मैसेजेज पेश किए गए थे, जिनमें दोनों के बीच तल्ख रिश्तों की बात सामने आई थी। वहीं, मस्क और ट्विटर के पूर्व सीईओ डॉर्सी के बीच हुए कुछ चैट भी लीक हुए थे।

इसमें मस्क ने ट्विटर के मैनेजमेंट को लेकर नाखुशी जाहिर की थी, जिसमें पराग अग्रवाल और विजया गड्डे के नाम शामिल थे। इस चैट में यह भी सामने आया था कि मस्क पराग अग्रवाल के साथ काम करने को लेकर उत्सुक नहीं हैं।

एलन मस्क पद के बदले इन तीन अधिकारियों को देंगे हर्जाना? :-

पराग अग्रवाल को 50 मिलियन डॉलर यानी करीब 412 करोड़ रुपये, ट्विटर के CFO रहे नेड सेगल (Ned Segal) को 37 मिलियन डॉलर यानी करीब 304 करोड़ रुपये और कंपनी की लीगल पॉलिसी, ट्रस्ट और सेफ्टी विभाग की हेड रहीं विजया गड्डे (Vijaya Gadde) को 17 मिलियन डॉलर यानी करीब 140 करोड़ रुपये दिए जाएंगे।

रिपोर्ट्स के अनुसार, अधिकारियों की बेस सैलरी और इक्विटी अवॉर्ड्स के एक्सीलेरेटेड वेस्टिंग के आधार पर उन्हें हर्जाना दिया जाएगा।

भारत को लेकर इसलिए तंगदिल हैं एलन मस्क :-

एलन मस्क का रवैया भारत को लेकर बेहद तंगदिल है। इसका एक बड़ा कारण है टेस्ला कार। असल में एलन मस्क टेस्ला कार को लेकर भारत आना चाहते थे। वह यहां के इलेक्ट्रॉनिक कार सेगमेंट में अपने लिए एक बड़ा बाजार देख रहे थे। दो साल पहले तक ऐसा लग रहा था कि यह बेहद आसानी से हो जाएगा। हालांकि, अब हालात पूरी तरह से बदल चुके हैं। इसकी जड़ में है सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी का वह बयान, जिसमें उन्होंने एलन मस्क को भारत आकर कार बनाने के लिए कह डाला।

गौरतलब है कि मस्क ने अमेरिका के बाद चीन में टेस्ला की फैक्ट्री डाली है। मस्क चाहते हैं कि वहीं कार पूरी तरह से एसेंबल करने के बाद भारतीय बाजारों में बेचा जाए। वहीं, गडकरी का कहना है कि अगर मस्क को भारत में कार बेचनी है तो यहीं फैक्ट्री डालें। दूसरी तरफ मस्क का कहना है कि टेस्ला ऐसी किसी भी जगह पर मैन्युफैक्चरिंग प्लांट नहीं लगाएगी, जहां हमें पहले कारों को बेचने और सर्विस करने की परमिशन नहीं है।

स्टारलिंक पर भी फंसा है पेंच :-

बात सिर्फ टेस्ला तक ही सीमित नहीं है। एलन मस्क के एक और ड्रीम प्रोजेक्ट स्टारलिंक पर भी भारत सरकार ने पेंच फंसा रखा है। स्टारलिंक मस्क की कंपनी है जो इंटरनेट सर्विस देती है। यह कंपनी स्पेसएक्स के जरिए सेटेलाइट इंटरनेट देती है। इसमें बिना किसी वायर के ग्रामीण इलाकों में भी सेटेलाइट के जरिए डायरेक्ट इंटरनेट मिल सकता है। हालांकि भारत सरकार की तरफ से इसको मंजूरी नहीं मिली है।

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स्पेसएक्स उपग्रह इंटरनेट सेवा स्टारलिंक 32 देशों में मौजूद है। भारत सरकार ने स्टारलिंक को बिना लाइसेंस के देश में सेटेलाइट इंटरनेट सर्विस की बुकिंग/रेंडरिंग बंद करने को कहा था। वहीं, स्टारलिंक के भारत निदेशक संजय भार्गव ने इस साल की शुरुआत में सरकारी दबाव के बीच पद छोड़ दिया था।

पराग को एलन मस्क से कहासुनी की चुकानी पड़ी कीमत :-

पराग अग्रवाल ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, बॉम्बे (IIT Bombay) और स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी (Stanford University) से पढ़ाई की है। न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, 2021 में पराग अग्रवाल की एलन मस्क के साथ सार्वजनिक और निजी तौर पर कहासुनी हो गई थी। वहीं, एलन मस्क ने कंटेंट मॉडरेशन को लेकर हुए फैसलों के मामले में विजया गाड्डे की भूमिका की भी सार्वजनिक तौर पर आलोचना की थी।

बता दें कि मस्क ने गुरुवार (27 अक्टूबर) को 44 अरब डॉलर की डील के साथ ट्विटर का अधिग्रहण कर लिया था। इसके बाद उन्होंने कंपनी में शीर्ष अधिकारियों की छंटनी कर दी। इसी के साथ मस्क ने ट्वीट किया, ‘‘पंछी आजाद हुआ।

वीडियो देखने के लिए नीचे लिंक पर क्लिक करें।

https://youtu.be/-A3eaZppNb0

बतौर CEO एक साल भी नहीं पूरा कर पाए पराग :-

ट्विटर के सीईओ (CEO) के तौर पर पराग अग्रवाल 11 महीने का ही कार्यकाल पूरा कर पाए। 38 वर्षीय पराग को पिछले साल नवंबर में ट्विटर का सीईओ (CEO) नियुक्त किया गया था। उन्हें कंपनी के सह-संस्थापक जैक डोर्सी के इस्तीफे के बाद ट्विटर का सीईओ (CEO) बनाया गया था।

हालांकि ट्विटर में एक कर्मचारी के तौर पर वह 10 साल से भी ज्यादा समय से नौकरी कर रहे थे। बताया जाता है कि उस समय ट्विटर में कुल कर्मचारियों की तादाद एक हजार से भी कम थी।

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