कहीं आपके आस-पास तो नहीं अंडरवर्ल्ड की स्लीपर सेल: विदेश में बैठकर मर्डर की प्लानिंग, शूटर को आतंकवादी जैसी ट्रेनिंग

कहीं आपके आस-पास तो नहीं अंडरवर्ल्ड की स्लीपर सेल: विदेश में बैठकर मर्डर की प्लानिंग, शूटर को आतंकवादी जैसी ट्रेनिंग ।

31 मई 2022 : कश्मीर के कुलगाम में एक महिला टीचर की स्कूल में घुसकर हत्या कर दी गई।

2 जून 2022 : हनुमानगढ़ के रहने वाले बैंक मैनेजर की विजय बेनीवाल की कुलगाम में बैंक में घुसकर हत्या कर दी गई।

3 दिसंबर 2022 : सीकर में गैंगस्टर राजू ठेहट की उसके घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई। तीनों वारदातों को अंजाम देने के लिए की गई प्लानिंग एक जैसी थी

रेकी : हत्या करने वालों को पता था कि महिला टीचर का स्कूल में आखिरी दिन है। हनुमानगढ़ के रहने बैंक मैनेजर विजय बेनीवाल की हत्या उस समय की गई जब बैंक में सबसे कम भीड़ थी। राजू ठेहट के हत्यारों को पता था कि उसका गनमैन एक दिन पहले ही छुट्टी पर गया है।

धोखा : बैंक मैनेजर का हत्यारा ग्राहक की तरह हाथ में बैग लिए बैंक में आया और गोली मार दी। राजू ठेहट के शूटर स्टूडेंट बनकर सेल्फी के बहाने आए। क्राइम सीन : खौफ पैदा करने के लिए टीचर को उसके स्कूल, मैनेजर को उसके बैंक और ठेहट को उसके घर के बाहर गोली मारी गई।

कुलगाम में हुई दोनों हत्यारों के पीछे आतंकी थे, वहीं राजू ठेहट की हत्या के पीछे थे आतंकी जैसे गैंगस्टर…

दरअसल, राजस्थान में अब गैंगस्टर आतंकवादियों के मॉड्यूल पर काम कर रहे हैं। इनके निशाने पर दूसरे गैंगस्टर ही नहीं, आम लोग भी हैं। सीकर में पिछले सप्ताह गैंगस्टर राजू ठेहट की हत्या करने आए 5 बदमाशों ने भी इसी मॉड्यूल पर काम किया। किसी टेररिस्ट आर्गेनाइजेशन की तरह शूटर को ट्रेनिंग दी गई। विदेश में बैठे गैंगस्टर रोहित गोदारा के इशारे पर एक के बाद एक 52 गोलियां ठेहट के सीने में उतार दी गई। इतना ही नहीं भागते समय ताराचंद नाम एक बेगुनाह शख्स की भी गोली मारकर हत्या कर दी।

वारदात का एक ही मकसद था – दहशत फैलाना। ताकि इस खौफ के बदले बड़े-बड़े मारवाड़ी व्यापारियों को धमकाकर करोड़ों की वसूली की जा सके। यही वजह है कि शूटआउट के तुरंत बाद गैंगस्टर रोहित गोदारा ने सोशल मीडिया पर पोस्ट डालकर इस मर्डर की जिम्मेदारी ली। राजस्थान जैसे शांत प्रदेश के लिए यह कोई आम घटना नहीं थी। पहली बार गैंगस्टर्स ने किसी बेगुनाह की जान ली। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम ने जब केस की पड़ताल की तो वो चौंकाने वाला मॉड्यूल सामने आया। ये है आतंक का ‘हाइब्रिड मॉड्यूल’। जिस तरह आतंकवादी आम लोगों के बीच रहकर मौका मिलते ही दहशत फैलाते ही, उसी मॉड्यूल पर गैंगस्टर काम कर रहे हैं।

सीकर में जो हत्याकांड हुआ उसके एक-एक पहलू का इस मॉड्यूल से कनेक्शन समझाएंगे लेकिन उससे पहले प्रदेश के मुख्यमंत्री का वो स्टेटमेंट पढ़िए जो ये इशारा करता है कि गैंग्स का ये मॉड्यूल कितना खतरनाक और पुलिस के लिए चुनौती बनता जा रहा है…..

पुलिस का अधिकारी या कर्मचारी किसी भी क्रिमिनल से नेक्सस (गठजोड़ ) रखेगा तो उसे अरेस्ट करेंगे।’ ‘हमने डीजीपी को निर्देश दिया है कि बाहर से जो गैंगस्टर आ रहे हैं, कोई विदेश में बैठे ऑपरेट कर रहा है, उन पर लगातार हमारी नजर है।’

आखिर क्या है ‘हाइब्रिड आतंकी मॉड्यूल ‘

सिविलियन और आतंकवादी, दोनों जिंदगियां जी रहे लोगों को ही हाइब्रिड आतंकी नाम दिया गया है। ये सामान्य आतंकी से अलग होते हैं। आम इंसान की जिंदगी जीने का नाटक करते हैं। पॉश कॉलोनियों में रहते हैं। सुरक्षा एजेंसियों के लिए ट्रैक करना मुश्किल होता है, क्योंकि वे आम जनता के बीच रहते हैं। इनका कोई क्राइम रिकॉर्ड नहीं होने के कारण पहचानना भी सिखाते हैं। यह आतंकी सरगनाओं से कम्युनिकेशन का वो तरीका इस्तेमाल करते हैं, जो तकनीक से भी पकड़ा न जाए।

कैसे बदमाश बन रहे हैं ‘हाइब्रिड गैंगस्टर’ गैंगस्टर

भी इसी तर्ज पर हाइब्रिड मॉड्यूल फॉलो कर रहे हैं। जिसको भी टारगेट बनाते हैं, पहले वहां की रेकी करते हैं। कुछ दिन तक वहां के लोकल की तरह रहना शुरू कर देते हैं। आना-जाना बढ़ाते हैं। आस-पास की दुकानों, शॉप्स पर खरीदारी करने के बहाने दिन बिताते हैं। देखकर कोई पहचान ही नहीं सकता कि ये गैंगस्टर्स हैं या सामान्य लोग एक बार टारगेट का सारा रूटीन जान लेने के बाद मर्डर का प्लान डिसाइड करते हैं।

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