क्या मंगलयान का ISRO (इसरो) से टूटा संपर्क? 1

ऑर्बिटर मिशन यानी MOM से संपर्क अब टूट चुका है। इस मिशन ने इसरो (ISRO) और भारत को बहुत कुछ दिलाया है। इसरो ने इस मिशन को सिर्फ 6 महीने के लिए भेजा था। लेकिन यह मिशन 8 साल और 8 दिन तक तक यह जिंदा रहा। जब इसके जीवन का अंत हो चुका है तो इससे देश और इंडियन स्पेस एजेंसी इसरो (इसरो) को और भारत को क्या नुकसान होगा? आइए जानते हैं।

भारत के इसरो(ISRO) द्वारा बनाया गया मंगलयान की उपलब्धियां :-

1.मंगलयान मंगल ग्रह की अंडाकार ऑर्बिट में सबसे दूर चक्कर लगा रहा था। पहली बार मंगल ग्रह के चंद्रमा डिमोस (Deimos) की तस्वीर तब ली। इसके पहले देश में किसी ने डिमोस की तस्वीर देखी भी नहीं थी।

2. छह महीने के मिशन के लिए मंगलयान भेजा गया था. क्या आपने देखा कि यह कितने साल जिंदा रहा। यह आठ साल और आठ दिन तक अपनी आखिरी सांस तक लाल ग्रह अर्थात् मंगल ग्रह के चारों तरफ चक्कर लगाता रहा।

ये किसी वैज्ञानिक चमत्कार से कम नहीं है। मंगलयान ने भारत के लिए क्या-क्या नहीं किया? मंगल ग्रह पर पानी की खोज और बहुत सारी खोज किए।

3. मंगलयान के मार्स कलर कैमरा (Mars Colour Camera) ने 1100 से ज्यादा तस्वीरें भेजीं। जिसकी मदद से इसरो ने एक मार्स एटलस (Mars Atlas) बनाया है। जिसमें आप मंगल ग्रह के अलग-अलग स्थानों की तस्वीरें देख सकते हैं।

उनके बारे में जान सकते है और समझ सकते हैं मंगलयान की वजह से और उस पर 35 से ज्यादा रिसर्च पेपर्स प्रकाशित हुए। वह भी पीयर रिव्यूड जर्नल्स में।

4. इसरो को कई स्पेस कॉमर्स, सर्विस और सैटेलाइट इमेजरी (Emagenary) के लिए डील्स भी मिले। सिर्फ एक मिशन से ही इसरो को इतना फायदा हुआ कि जिसके बारे में कुछ भी बता पाना मुश्किल हो रहा है।

मंगलयान मिशन सिर्फ एक वैज्ञानिक मिशन ही नहीं बल्कि यह देश के लिए गौरव की बात थी। बच्चे, छात्र-छात्राओं, मीडिया और अंतरराष्ट्रीय साइंस-तकनीकी समुदाय के लिए रोचक विषय बन गया था।

मगल ग्रह पर मंगलयान मिशन

भारत की युवा पीढ़ी में साइंस और इसरो को लेकर जिज्ञासा बढ़ी। करीब तीन साल तक सिर्फ मंगलयान और इसरो की चर्चा होती रही। खबरें छपती रहीं. लोगों के बीच इसरो के अन्य मिशनों को लेकर जिज्ञासा बढ़ गई।

5. देश और इसरो के वैज्ञानिकों ने कभी सोचा भी नहीं था कि वो मात्र 450 करोड़ रुपये में इतना बड़ा मिशन पूरा करने जा रहे हैं।और यह मिशन पहली बार में अपने अंतरिक्ष यान को वो मंगल ग्रह तक पहुंचा पाएंगे। जबकि अमेरिका, रूस और यूरोप जैसे देश कई बार फेल होने के बाद मंगल ग्रह तक पहुंच पाए थे।

मंगलयान के सही समय और एक ही बार में मंगल पर पहुंचने से ISRO(इसरो) की मान दुनिया भर में बढ़ गई। उसे अलग-अलग देशों से सैटेलाइट लॉन्च करने के ज्यादा ऑर्डर मिलने लगे। और इस मंगलयान मिशन को अलग ही गौरव प्राप्त हुआ।

मंगल पर ये मिशन सफल होने के बाद ये पता चला कि यह जीवन संभव है

मंगलयान का सफर वीडियो जरूर देखिए ।

6. कभी मंगल ग्रह की सबसे दूर जाकर तस्वीर ली तो कभी उसके बेहद नजदीक आकार यानी हाइली एलिप्टिकल ऑर्बिट जियोमेट्री से लेकर नजदीकी प्वाइंट तक इसी ऑर्बिट की वजह से इसरो के वैज्ञानिक मंगल का फुल डिस्क मैप (Full Disc Map) बना पाए।

क्या मंगलयान ने वैज्ञानिक स्टडी की है?

मंगल ग्रह पर मिला जल का एक झील

मंगलयान ने सौर ऊर्जा से संबंधित सोलर डायनेमिक्स (Solar dinemix) की स्टडी की है। मंगल ग्रह के वायुमंडल के जरिए पूरे ग्रह पर आए धूल के तूफान की स्टडी की। मंगल ग्रह के एक्सोस्फेयर (Exosphare) में हॉट आर्गन की खोज। और सबसे बड़ी बात कि मंगल पर पानी की एक झील मिली है जिससे यह पता चला है कि यहां पर भी जल उपलब्ध है।

मंगलयान के MENCA यंत्र ने बताया कि मंगल की सतह से 270 किलोमीटर ऊपर ऑक्सीजन और CO2 की कितनी मात्रा है। इनसे स्टडी से पता चला है कि वहां पर ही जीवन संभव है।क्या यह अब भी काम हो सकता है।

मंगलयान से मिले डेटा पर देश और दुनिया के साइंटिस्ट रिसर्च और स्टडी कर सकते हैं। देश के शैक्षणिक संस्थानों के स्टूडेंट्स इसरो से मंगल पर मिले डेटा, दस्तावेज और रिपोर्ट पर थीसिस बना सकते हैं।अब क्या नहीं होगा।

1. कोई नया नक्शा नहीं बन पाएगा। न ही किसी तरह का नया रिसर्च हो पाएगा।

2.जब तक नया मंगलयान यानी मंगलयान-2 नहीं जाता, तब तक मंगल ग्रह से कोई खबर नहीं आएगी।

3. भारत को मंगल ग्रह से संबंधित डेटा के लिए अमेरिका, यूरोप या अन्य देशों पर निर्भर रहना होगा।मंगलयान-2 की लॉन्चिंग कब तक होगी?भारत में मंगलयान-2 मिशन को लॉन्च करने के लिए तैयारियां कहां पहुंची हैं?

इसके अलावा मंगलयान-2 में क्या-क्या उपकरण शामिल किए जाएंगे। इसकी लॉन्चिंग की तारीख क्या हो सकती है? भारत में मंगलयान की योजना क्या है? और यह मंगलयान-1 से कितना अलग होगा? आइये जानते हैं।मंगलयान 2 तैयारियां बहुत पहले ही शुरू हो गए हैं।

भारत ने मंगल ग्रह पर भी भारत का झंडा आखिर लगा ही दिया।

मंगल ग्रह की जानकारी जुटाने के लिए भेजा गया भारत का पहला ऑर्बिटर मंगलयान का संपर्क इसरो के ग्राउंड स्टेशन से टूट गया है। बताया गया है कि लॉन्चिंग के आठ साल तक मंगल के चक्कर काटने वाले मंगलयान का ईंधन और बैट्री खत्म हो गई थी। इसके चलते 450 करोड़ के भारत के पहले मंगल मिशन का अंत हुआ।

हालांकि, मंगलयान भले ही मंगल ग्रह के लिए भारत का पहला मिशन हो, लेकिन जाहिर तौर पर यह आखिरी नहीं था। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (ISRO) ने मंगल ग्रह के लिए अपने दूसरे मिशन की तैयारी कई दिनों पहले ही शुरू कर दी थी। इसे मंगलयान-2 नाम दिया गया है। हालांकि, बीते दिनों में इस नए मिशन को लेकर जानकारी स्पष्ट नहीं हुई है। लेकिन फिर भी इतना जरूर पता है कि मंगलयान 2 बस कुछ दिनों में बन जाएगा।

संसद में जितेंद्र सिंह की तरफ से दिए इस बयान के बाद इसरो ने अनाउसमेंट ऑफ अपॉर्च्यूनिटी (Announcement of Opportunities Documents) निकाला था। इसमें मिशन के लिए जरूरी बातों का जिक्र किया गया था। इसके अलावा ऑर्बिटर को मंगल ग्रह के और करीब की कक्षा में स्थापित करने का प्रस्ताव दिया गया। 2019 के करीब कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि मंगलयान-2 में मंगल के चक्कर लगाने वाले एक ऑर्बिटर के साथ एक लैंडर भी भेजा जाएगा, जो ग्रह की सतह पर उतरकर अहम जानकारियां को जुटाएगा।

क्या मंगल ग्रह के लिए आगे भी मिशन लॉन्च करेगा भारत?

इसरो ने मंगलयान-1 की लॉन्चिंग 5 नवंबर, 2013 को की गई थी। इसे मंगल की कक्षा में 24 सितंबर 2014 को स्थापित कराया गया था। ऐसा माना जा रहा था कि भारत सरकार इस मिशन की सफलता के बाद जल्द ही मंगल ग्रह के लिए एक और प्रोजेक्ट का ऐलान कर सकती है। हालांकि, नए प्रोजेक्ट को लेकर अगली जानकारी 2016 में सामने आई।

जब केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में लिखित जवाब में कहा था कि मार्स ऑर्बिटर मिशन-2 की तैयारियां की जा रही हैं और मिशन का मकसद और ब्लूप्रिंट भी बनाया जा रहा है।

हालांकि, बाद में इसरो प्रमुख के. सिवन ने एक इंटरव्यू में साफ किया था कि मिशन में सिर्फ एक ऑर्बिटर ही प्रस्तावित है। 2021 में मार्स ऑर्बिटर मिशन के प्रोजेक्ट डायरेक्टर सुबैया अरुणन ने कहा था कि इसरो मंगलयान-2 में एयरोब्रेकिंग तकनीक का इस्तेमाल करेगा, ताकि ऑर्बिटर को मंगल के और करीबी कक्षा में स्थापित किया जा सके।

भारत के अगले मंगल मिशन की लॉन्चिंग आखिर कब तक होगी?

मंगलयान का बेहतरीन लोगों

रिपोर्ट्स की मानें तो मंगलयान-2 की लॉन्चिंग फिलहाल इसरो की प्राथमिकता में नहीं है। अधिकारियों ने मंगल मिशन की लॉन्चिंग 2025 तक टाल दी है।

उनका कहना है कि यह प्रोजेक्ट अभी भी निर्माण के फेज में है और तैयारियां आगे बढ़ रही हैं। इसरो की तरफ से फिलहाल अंतरिक्ष में पहले इंसान को भेजने के लिए मिशन- गगनयान पर काम चल रहा है। इसके अलावा चांद पर ऑर्बिटर-लैंडर उतारने के मिशन चंद्रयान-3 को भी प्राथमिकता श्रेणी में रखा गया है। इसके अलावा एजेंसी एक और प्रोजेक्ट आदित्य-एल1 परियोजना पर काम कर रही है। एक इसरो अफसर का तो यहां तक कहना है कि मंगल मिशन फिलहाल मंजूरी पाने वाले प्रोजेक्ट्स में नहीं है।

न्यूज एजेंसी से बातचीत में इस अधिकारी ने बताया कि मंगलयान के लिए प्रोजेक्ट के प्रस्तावों पर विचार बाकी है। अफसरों के अनुसार, मंगलयान-2 मिशन को फाइनल करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत भी पड़ सकती है।

मंगलयान-2 मंगलयान-1 से कितना होगा अलग? :-

भारत के अगर मार्स मिशन के जो एओ डॉक्यूमेंट सामने आया था। उसमें सैटेलाइट की पेलोड क्षमता 100 किलोग्राम प्रस्तावित थी। बताया गया है कि इसमें जो पेलोड लगेंगे, उनमें से एक ARIS नाम का उपकरण होगा।

हालांकि, इसे लेकर ज्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है। सिर्फ इतनी जानकारी दी गई है कि इसे भारत के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ स्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी (IIST) के संभाग ‘स्पेस सैटेलाइट सिस्टम्स और पेलोड सेंटर’ (SSPACE) की तरफ से विकसित किया जा रहा है। इससे जुड़े इंजीनियरिंग मॉडल्स और हाई वैक्यूम टेस्ट किए जा चुके हैं।

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