तालाब का पानी बना ‘मिनरल वाटर’: जड़ी-बूटियों से रूद्रसागर को साफ करने की कहानी…

तालाब का पानी बना ‘मिनरल वाटर’: जड़ी-बूटियों से रूद्रसागर को साफ करने की कहानी…

उज्जैन में महाकाल लोक के आकार लेने के साथ कई बड़े बदलाव हुए। रूद्रसागर तालाब की तस्वीर भी बदल गई। इसके गंदे हरे पानी को ऑर्गेनिक बॉयो कल्चर से ट्रीट करके साफ कर दिया गया है। उज्जैन में महाकाल लोक तैयार करने में रूद्रसागर तालाब का गंदा पानी बड़ी चुनौती रही। चुनौती इसलिए भी क्योंकि महाकाल लोक इसी के किनारे हैं। इस तालाब में 12 हजार घरों का सीवरेज गिरता था। 9 महीने की मेहनत के बाद तालाब का पानी ‘मिनरल वाटर’ की तरह साफ हो गया है। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 अक्टूबर को महाकाल लोक का लोकार्पण करेंगे।

पहले महाकाल लोक को जान लीजिए

महाकाल के आंगन को 856 करोड़ की लागत से 2 फेज में डेवलप किया जा रहा है। 2.8 हेक्टेयर में फैला महाकाल का पूरा एरिया 47 हेक्टेयर का हो जाएगा। भक्त यहां 940 मीटर लंबे महाकाल लोक में शिव महिमा को जानेंगे। 940 मीटर लंबे कॉरिडोर पर चलते हुए भक्त महाकाल मंदिर के गर्भगृह तक पहुंचेंगे। पहले फेज में महाकाल परिसर के साथ रूद्रसागर तालाब को भी संवारा गया है। रूद्रसागर को साफ करना सबसे बड़ी चुनौती थी, क्योंकि जलकुंभी से ढंके इस तालाब का पानी हरा होने के साथ ही बहुत गंदा भी था।

अब जान लेते हैं वैदिक तरीके से साफ हुए रूद्रसागर की….

महाकाल लोक की भव्यता रूद्रसागर का पानी साफ हुए बिना अधूरी थी। रूद्रसागर महाकाल पथ से सटा हुआ है। इसे साफ करने के लिए वैदिक तरीका अपनाया गया। नोएडा से प्लेन से 2.5 लाख लीटर वैदिक हर्बल ट्रीटमेंट मंगवाया गया। इसे 750 लीटर ऑर्गेनिक बॉयो कल्चर की मदद से बनाया गया। इसकी मदद से 7 दिन में पानी साफ हो गया।

अब बताते हैं, 7 दिन में कैसे हुआ चमत्कार

पानी को साफ करने के लिए भोपाल की कंपनी ग्रीन लाइफ टेक्नोलॉजी से मदद ली गई। कंपनी के टेक्निकल हेड संजय गुप्ता बताते हैं कि हमने वाटर ट्रीटमेंट कर वैदिक तरीके से पानी को साफ किया। सब्जी, फल, गुड़ और हिमालय की जड़ी-बूटियों के मिश्रण को स्पेशल प्रोसेस कर बॉयो कल्चर नाम का लिक्विड बनाया। अमूमन 1 लीटर लिक्विड में 1000 मिली लीटर पानी को मिलाया जाता है, लेकिन रूद्रसागर में बहुत अधिक गंदगी थी। ऐसे में 1 लीटर लिक्विड में 300 मिली लीटर पानी का घोल तैयार किया गया। इसके बाद करीब 750 लीटर सॉलिड लिक्विड को 45 टैंकर पानी में घोलकर रूद्रसागर में डाला गया। इस तरह करीब 2 लाख 25 हजार लीटर ऑर्गेनिक बायो कल्चर डाला गया। 1 अक्टूबर से लेकर 7 अक्टूबर तक लगातार इसकी मॉनिटरिंग की गई। अब तालाब का पानी इतना साफ हो चुका है कि किनारे पर रखे पत्थर भी साफ नजर आ रहे हैं।

बहता और ठहरा दोनों तरह का पानी साफ हो जाता है

संजय गुप्ता ने बताया कि वैदिक लिक्विड को नोएडा स्थित कंपनी के ट्रीटमेंट प्लांट मैं तैयार करवाया गया। यहां से प्लेन की मदद से उज्जैन मंगवाया गया। नगर निगम के 45 टैंकर की मदद से 5 दिन में पूरा पानी साफ हो गया। इस ट्रीटमेंट से रुके हुए पानी के साथ बहते हुए पानी को भी साफ किया जा सकता है। 8 अक्टूबर को भेजे गए पानी के सैंपल की रिपोर्ट आना बाकी है। पिछली जो रिपोर्ट आई है, उसमें पानी में BOD (बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड ), COD (केमिकल ऑक्सीजन डिमांड) और DO (ऑक्सीजन डिसॉल्व) का अनुपात इतना हो गया है कि अब इसमें जलीय जीव जीवित रह सकते हैं।

9 महीने तक ऐसे चला रूद्रसागर को साफ करने का काम तालाब को साफ-सुथरा बनाने के लिए 40 लोगों ने डेढ़ महीने तक जलकुंभी हटाने के लिए दिन-रात एक किया। इसके लिए मशीनों की भी मदद ली गई। रूद्रसागर विस्तारीकरण के लिए 20 करोड़ की प्रस्तावित योजना में 10 करोड़ रुपए तो सिर्फ सीवरेज रोकने और जलकुंभी हटाने में खर्च हो गए। यही सबसे बड़ा काम भी था। 2016 के सिंहस्थ के बाद पहली बार इस तालाब पर ऐसा फोकस हुआ। तब भी इस पर 5 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं निकला और जलकुंभी बढ़ती ही चली गई।

73 सालों में पहली बार मनाया जाएगा Supreme Court का स्थापना दिवस

शनिवार यानी आज 4 फरवरी को पहली बार भारत के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) का स्थापना दिवस मनाया जाएगा।इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सिंगापुर के न्यायाधीश जस्टिस सुंदरेश मेनन को बुलाया गया है।

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