दूसरे राज्यों में कांग्रेस को जिताने में फेल राजस्थानी नेता: गुजरात में रघु शर्मा प्रभारी, चौधरी ने पंजाब गंवाया; जितेंद्र-धीरज भी नहीं जिता पाए

दूसरे राज्यों में कांग्रेस को जिताने में फेल राजस्थानी नेता: गुजरात में रघु शर्मा प्रभारी, चौधरी ने पंजाब गंवाया; जितेंद्र-धीरज भी नहीं जिता पाए गुजरात और हिमाचल प्रदेश के चुनावों के बाद जहां गुजरात में बीजेपी की जीत की चर्चा है। वहीं, दूसरी ओर कांग्रेस भी चर्चा में है। अव्वल तो इसलिए कि चार साल बाद कांग्रेस ने कोई बड़ा चुनाव जीता है।

दूसरा इसलिए कि गुजरात में कांग्रेस ने इतिहास की सबसे बड़ी हार झेली है। राजस्थान में चर्चा इसलिए है क्योंकि गुजरात के प्रभारी और सीनियर ऑब्जर्वर दोनों राजस्थान से थे।

गुजरात चुनाव के पूरे मैनेजमेंट की जिम्मेदारी राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत की थी। वहीं, गुजरात में प्रभारी राजस्थान में केबिनेट मंत्री रहे डॉ. रघु शर्मा को बनाया गया था। उम्मीद थी कि कांग्रेस गुजरात में 27 साल की एंटी इनकम्बेंसी को भुनाएगी और अच्छा परफॉर्म करेगी। मगर हुआ बिलकुल उल्टा। कांग्रेस को गुजरात में इतिहास की सबसे बुरी हार नसीब हुई।

गुजरात में कांग्रेस को महज 17 सीटों पर जीत नसीब हुई। गुजरात में कांग्रेस की सबसे बड़ी हार है। इससे पहले कांग्रेस का सबसे खराब प्रदर्शन 1995 में था । जब कांग्रेस सिर्फ 45 सीटें जीत सकी थी। मगर इस बार कांग्रेस ने हार के सारे रिकॉर्ड तोड़ते हुए सबसे खराब हार का रिकॉर्ड अपने नाम किया।

राजस्थान के नेताओं की जिम्मेदारी में मिली गुजरात की हार कांग्रेस में पहला किस्सा नहीं है। इससे पहले भी कई बार राजस्थानियों की जिम्मेदारी में कांग्रेस बुरी तरह हारी है।

पंजाब में हरीश चौधरी नहीं जीता पाए

ज्यादा दूर जाए बगैर अगर सिर्फ 9 महीने पीछे जाते हैं तो पंजाब का विधानसभा चुनाव आता है। इसी साल पंजाब चुनाव में भी कांग्रेस को बुरी हार मिली। यहां प्रभारी राजस्थान के ही पूर्व मंत्री हरीश चौधरी थे। उनके प्रभारी रहते कांग्रेस सिर्फ 18 सीटों पर सिमट गई और सत्ता गंवा दी। यह भी तब हुआ जब किसान आंदोलन के चलते प्रमुख विपक्षी दल अकाली और बीजेपी के खिलाफ गुस्से की लहर कांग्रेस में थी।

पंजाब में कांग्रेस को यहां 25 साल की सबसे खराब हार मिली। पंजाब में कांग्रेस के तमाम मंत्री हार गए। नई पार्टी आम आदमी पार्टी ने सरकार बना ली। पंजाब चुनाव के बाद हरीश चौधरी के मैनेजमेंट को लेकर भी कई सवाल उठे। इससे पहले 1997 के चुनाव में ऐसा हुआ था जब कांग्रेस ने 105 सीटों पर चुनाव लड़ते हुए 14 सीटें जीती थी। मगर तब देशभर में कांग्रेस विरोधी लहर थी।

यूपी में धीरज गुर्जर के सहप्रभारी रहते 2 सीटें

इसी तरह 2022 के चुनाव में ही एक और राजस्थानी की परीक्षा हुई। कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव राजस्थान धीरज गुर्जर को यूपी का सह-प्रभारी बनाया गया। हालांकि, यूपी का चुनाव प्रियंका गांधी के नेतृत्व और उनके मैनेजमेंट में लड़ा गया। मगर धीरज गुर्जर वहां कांग्रेस के लिए बेहद अहम थे। मगर यूपी चुनाव में कांग्रेस ने 399 सीटों पर चुनाव लड़ा मगर जीत सिर्फ 2 ही सीटें सकी। कांग्रेस का बुरी तरह सफाया हुआ।

भंवर जितेंद्र सिंह के रहते हारे असम

इसी तरह एक साल पीछे जाते हैं तो असम की हार याद आती है। 2021 के विधानसभा चुनाव में असम के प्रभारी राजस्थान के भंवर जितेंद्र सिंह थे । जितेंद्र सिंह राजस्थान से केंद्र में मंत्री भी रह चुके हैं। इसके अलावा वे कांग्रेस की वर्किंग कमेटी के सदस्य भी थे। फिलहाल वे स्टीयरिंग कमेटी के सदस्य हैं। 2021 में कांग्रेस ने असम में 95 सीटों पर चुनाव लड़ा। इसमें से सिर्फ 29 सीटें कांग्रेस जीत सकी। एनआरसी के चलते विरोध, अच्छा गठबंधन होने के बावजूद कांग्रेस जीत दर्ज नहीं कर सकी।

बिहार में जोशी के भाषण देते सरकार गिर रही थी

इसी तरह बिहार 2015 और असम 2016 के विधानसभा चुनाव में राजस्थान के वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी प्रभारी थे। बिहार में जोशी के प्रभारी रहते कांग्रेस ने 41 में से 27 सीटें जरूर जीती। इसके बाद महागठबंधन की सरकार भी बनी। मगर दो साल बाद ही महागठबंधन सरकार गिर गई। जब ऐसा हो रहा था तब जोशी जयपुर में भाषण दे रहे थे। इससे पहले असम में सीपी जोशी के प्रभारी रहते ही पहली बार बीजेपी की सरकार राज्य में बनी। वहीं, इसी दौरान हिमंता बिस्वा सरमा कांग्रेस छोड़कर बीजेपी गए थे। इस चुनाव में 122 में से 26 सीटें ही कांग्रेस जीत पाई।

73 सालों में पहली बार मनाया जाएगा Supreme Court का स्थापना दिवस

शनिवार यानी आज 4 फरवरी को पहली बार भारत के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) का स्थापना दिवस मनाया जाएगा।इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सिंगापुर के न्यायाधीश जस्टिस सुंदरेश मेनन को बुलाया गया है।

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