प्रोजेक्ट कार्य एवं प्रयोगात्मक कार्य कक्षा 10 के लिए

प्रयोगात्मक कार्य –

उक्त प्रस्तर 2 एवं 4, के विभिन्न मॉडल में प्रयोगात्मक कार्य कराए जाएंगे। इस कार्य हेतु 15 अंक निर्धारित हैं। प्रयोगात्मक परीक्षा का मूल्यांकन विद्यालय स्तर पर आंतरिक होगा तथा ग्रेड प्रदान किया जाएगा।

प्रोजेक्ट कार्य

प्रोजेक्ट कार्य 15 अंक का होगा दिए गए प्रोजेक्ट की सूची में से तीन प्रोजेक्ट अवश्य तैयार कराए जाएं। शिक्षक इसके अतिरिक्त विषय से संबंधित प्रोजेक्ट तैयार करा सकते हैं। प्रोजेक्ट का मूल्यांकन विद्यालय स्तर पर आंतरिक होगा।

प्रयोगात्मक एवं प्रोजेक्ट कार्य :-

Computer science में 30 अंकों का प्रायोगिक एवं आंतरिक मूल्यांकन होगा, प्रोजेक्ट कार्य 15 अंक का होगा। दिए गए प्रोजेक्ट की सूची में से तीन प्रोजेक्ट अवश्य तैयार कराए जाएं। शिक्षक इसके अतिरिक्त विषय से संबंधित प्रोजेक्ट तैयार करा सकते हैं। प्रोजेक्ट का मूल्यांकन विद्यालय स्तर पर आंतरिक होगा।

(1) कम्युनिकेशन मीडिया (तार, बेतार)

(2) नेटवर्क

(3) इंटरनेट (e-mail-id, website ……….etc)

(4) लाइनेक्स (सी. एल. आई.) mure, cat, is, mkdir, ect.)

(5) लाइनेक्स ऑफिस-स्टार कैल, स्टार इंट्रेंस, स्टार राइटर

(6) लाइनेक्स (जी. यू. आई.) इंटरफेस

(7) लॉजिक गेट्स

(8) सी प्रोग्रामिंग (ऐरे)

(9) स्ट्रिंग मैन्यूपुलेशन

(10) फंक्शन

प्रोजेक्ट-1

कम्युनिकेशन मीडिया (तार, बेतार)

तार संचार माध्यम :

तार द्वारा संचार पर आधारित हम निम्न प्रकार के तारों का प्रयोग करते हैं।

(1) व्यावर्तित युग्म (Twisted-pair cable)

(2) समाक्ष तार (Co-axial Cable)

(3) प्रकाशिक तंतु केबल (Optical Fibre Cable)

(1) व्यावर्तित युग्म (Twisted-pair cable) :

इस प्रकार कि संचार माध्यम का प्रयोग ऐसी व्यवस्था में किया जाता है जहां ट्रांसमीटर तथा रिसीवर के मध्य अधिक दूरी ना हो। टेलीफोन लाइन इसी प्रकार का संचार माध्यम है जिसका डाटा संचरण में अधिक प्रयोग किया जाता है। इसमें दो कुचालक हटाने के तारों को आपस में लिपटा कर एक तार का रूप दिया जाता है। इन्हें आपस में इसलिए लपेटा जाता है जिससे अन्य तारों में संचालित हो रहे डेटा के कारण डेटा संचरण में कोई बाधा उत्पन्न ना हो। इन तारों की मोटाई 22 या 24 गेज की होती है। बाबा धाम से बचने के लिए इन दोनों के तारों के ऊपर भी कभी-कभी एक प्लास्टिक का फूल चढ़ा दिया जाता है। खोल चढ़े तार से डाटा प्रसारण के समय न्यूनतम बाधा होती है।

Twisted Pair Cable

(2) समाक्ष तार (Co-axial Cable) :

समक्ष तार व टेलीफोन लाइन की तरह अधिक प्रचलित संचार माध्यम है। घर में प्रयोग होने वाले केबल टीवी नेटवर्क के लिए प्रयुक्त होने वाला संचार माध्यम समाक्ष तार ही है, जिसे केवल के नाम से भी जाना जाता है।

(3) प्रकाशिक तंतु केबल (Optical Fibre Cable) :

प्रकाशिक तंतु केवल को ऑप्टिकल फाइबर भी कहते हैं। यह ऑप्टिक्स तार, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सिगनल (एनालॉग और डिजिटल) को प्रकाश तरंग में परिवर्तित कर संचरित करता है, अदर डाटा संचरण प्रकाश तरंग की गति से होता है। एक फाइबर ऑप्टिक्स केबल में हजारों महीन लाइनें होती हैं जो शीशे से अथवा प्लास्टिक की बनी होती हैं। यह लाइनें अत्यंत महीन मात्र 2 से 200 माइक्रोमीटर व्यास की होती हैं। इन लाइनों को ‘फाइबर’ कहते हैं, वैसे तो फाइबर के निर्माण के लिए उच्चतम धातु अल्ट्रा शुद्ध सिलिका का प्रयोग किया जाता है जो कि सस्ता लोन आसानी से उपलब्ध होने वाला साधन है। इन सभी फाइबर को एक बंडल के रूप में इकट्ठा कर इन पर प्लास्टिक अथवा शीशे का आवरण चढ़ा कर एक केवल के रूप में ढाल दिया जाता है, जिसका स्वरूप बेलनाकार होता है। प्रकाशिक तंतु केवल डेटा संचरण के लिए बैंडविथ उपलब्ध कराती है। अपनी बनावट के कारण यह बहुत टिकाऊ होता है।

प्रकाशिक तंतु केवल की प्रत्येक लाइन अलग तीव्रता का इनपुट डाटा संचरित कर सकता है। इस प्रकार एक ही प्रकाशिक तंतु केवल हजारों टेलीफोन लाइनों का डाटा तो हजारों ट्रांसमीटर का डाटा अलग-अलग प्रसारित कर सकता है। इसके द्वारा प्रसारण में किसी प्रकार का शोर अथवा अन्य व्यवधान उत्पन्न नहीं होते हैं। इसकी तेज प्रसारण गति एवं अधिक मात्रा में डाटा प्रसारण करने की क्षमता के कारण बड़ी-बड़ी कंपनियों में LAN ऐंप्यूटर नेटवर्क के लिए इसी माध्यम का प्रयोग किया जा रहा है।

Optical fibre cable

बेतार संचार माध्यम

बेतार संचार प्रणाली में, सिंह नरूका प्रेषण एवं अभिग्रहण बिना किसी तार के होता है। इसलिए इन्हें ‘बेतार संचार प्रणाली’ कहते हैं। इन्हीं निम्नलिखित माध्यमों के अंतर्गत वर्गीकृत किया गया है।

(1) रेडियो तरंग (Radiowave) :

विद्युत चुंबकीय स्पेक्ट्रम के उस भाग को; जिसकी आवृति 10 किलो हर्टज से 1 गीगा हर्टज के मध्य होती है, सामान्यतः ‘रेडियो आवृत्ति’ कहते हैं।

(2) सूक्ष्म तरंग (Microwave) :

सूक्ष्म संचार में कुछ विशेष प्रकार के उपकरणों द्वारा, रेडियो सिग्नलों का प्रेषण किया जाता है। वे आवृतियां; जिन पर सूक्ष्म तरंग रेडियो सिनलों का प्रेषण किया जाता है। उनको ‘रेडियो आवृत्तियां’ कहते हैं माइक्रोवेव सिग्नल दो प्रकार से संचारित किए जा सकते हैं।

(1) रिपीटर केंद्र के माध्यम से

(2) उपग्रह संचार के माध्यम से।

यह दोनों ही तकनीक twisted cable तकनीक की अपेक्षा उच्च गति और बृहद मात्रा में डाटा का संचरण करती है।

(1) रिपीटर केंद्र के माध्यम से :

संप्रेषण के लिए दिशा आत्मक परवलयाकार एंटीना का प्रयोग किया जाता है। रेडियो आवृत्तियां किसी बाधा को पार नहीं कर सकती। अतः इस संसार के लिए इसके मध्य में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं होनी चाहिए। यही कारण है कि माइक्रोवेव प्रणाली में प्रेषक एवं ग्राही बहुत ही उची मीनारों पर स्थापित किए जाते हैं। सुदूर संप्रेषण के लिए प्रवर्धन (Amplification) भी आवश्यक होता है। दृष्टि की सीध में ही ट्रांसमिशन तथा बीच-बीच में परिवर्तन की आवश्यकता; किन्हीं दो कारणों से इस प्रणाली में 40 से 50 किलोमीटर की दूरी पर रिपीटर केंद्र स्थापित किए जाते हैं। इस प्रणाली द्वारा 16GB प्रति सेकेंड की दर से सूचनाएं भेजी जा सकती हैं। यही कारण है कि इस प्रणाली द्वारा एक साथ अनेक दृश्य और श्रव्य चैनल प्रसारित किए जाते हैं।

(2) उपग्रह संचार के माध्यम से :

यह माइक्रोवेव सिग्नलों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजने की सबसे तेज प्रणाली है। उपग्रह संचार में सर्वप्रथम उस स्थान से; जहां से सूचनाओं या आंकड़ों का प्रेषण किया जा रहा है, सूक्ष्म तरंग प्रेषकों के द्वारा, सूचना या आंकड़ों को सिग्नलों के रूप में उपग्रह तक पहुंचाया जाता है। यह उपग्रह पृथ्वी से बाहर, अंतरिक्ष मे, उसकी कक्षा के समकक्ष स्थापित सूक्ष्म तरंग रिले केंद्र होते हैं। यह उपग्रह; रॉकेटों द्वारा विश्वत रेखा से 36000 किलोमीटर की दूरी पर अंतरिक्ष में पृथ्वी की कक्षा के समकक्ष छोड़ दिए जाते हैं। पृथ्वी की गति से घूमती रहने के कारण इन की भौगोलिक स्थिति; पृथ्वी के सापेक्ष स्थिर रहती है। अतः पृथ्वी पर इस्थित किसी प्रसारण केंद्र से एंटीना द्वारा रेडियो सिग्नल का प्रसारण तथा उनकी पुनः प्राप्ति संभव हो जाती है।

(3) अवरक्त प्रकाश (Infrared light) :

बेतार संचार का एक अन्य माध्यम ‘अवरक्त प्रकाश’ है। अवरक्त प्रकाश द्वारा संचार प्रणाली के अंतर्गत केंद्रों के मध्य आंकड़ों के आदान-प्रदान के लिए विशेष प्रकार के डायोड वालों का प्रयोग किया जाता है। अवरक्त प्रकाश दिवार या अन्य पारदर्शी माध्यमों के आर पार नहीं जा सकता। अवरक्त प्रकाश संचार प्रणाली का प्रयोग अधिकांशतः छोटिया खुले स्थान पर संचार हेतु किया जाता है।

अवरक्त प्रकाश संचार प्रणाली के लाभ : बेतार संचार प्रणाली पर आधारित इस माध्यम के प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं।

(a) अवरक्त प्रकाश के उपकरण अपेक्षाकृत सस्ते होते हैं।

(b) इनमें उच्च संचार दर संभव होती है।

(c) इनमें प्रच्छन्न श्रवण नहीं होता।

स्व – मूल्यांकन हेतु निर्देशन

प्रोजेक्ट संख्या 1 की अपनी तैयारी का अध्ययन करने के लिए आपको निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर आने चाहिए।

प्रश्न.1 कार द्वारा संचार पर आधारित हम किन माध्यमों का प्रयोग करते हैं?

उत्तर- तार द्वारा संचार पर आधारित हमने में प्रकार की माध्यमों का प्रयोग करते हैं। (a) व्यावर्तित युग्म (b) समाक्ष तार (c) प्रकाशिक तंतु केबल।

प्रश्न.2 बेतार संचार माध्यम को वर्गीकृत कीजिए।

उत्तर– वेदर संचार माध्यम को निम्न प्रकार वर्गीकृत किया जाता है। (1) रेडियो तरंग (2) सूक्ष्म तरंग।

प्रश्न.3 माइक्रोवेव सिग्नल किस प्रकार संचारित किया जा सकता है?

उत्तर- माइक्रोवेव सिग्नल दो प्रकार से संचारित किए जा सकते हैं। (1) रिपीटर केंद्र के माध्यम से (2) उपग्रह संचार के माध्यम से।

प्रश्न.4 किस माध्यम से एक साथ अनेक दृश्य और श्रव्य चैनल प्रसारित किए जाते हैं?

उत्तर- एक साथ अनेक दृश्य और श्रव्य चैनल रिपीटर केंद्र के माध्यम से प्रसारित किए जाते हैं।

प्रश्न.5 माइक्रोवेव सिनलों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर शीघ्रता से किस माध्यम से भेजा जा सकता है?

उत्तर- माइक्रोवेव सिग्नलों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर उपग्रह संचार के माध्यम से शीघ्रता से भेजा जा सकता है।

73 सालों में पहली बार मनाया जाएगा Supreme Court का स्थापना दिवस

शनिवार यानी आज 4 फरवरी को पहली बार भारत के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) का स्थापना दिवस मनाया जाएगा।इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सिंगापुर के न्यायाधीश जस्टिस सुंदरेश मेनन को बुलाया गया है।

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Khushboo Guptahttps://untoldtruth.in/
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