भारत की 6 शास्त्रीय भाषाएं एवं इसके महत्व (Classical languages ​​of India and their importance)

Indian Classical Languages : पापुआ न्यू गिनी, इंडोनेशिया और नाइजीरिया के बाद भारत में दुनिया की चौथी सबसे अधिक भाषाएं हैं। जो संविधान की 8 वीं अनुसूची में शामिल हैं| इन भाषाओं में कुछ भाषाओँ को भारत की शास्त्रीय भाषा (Indian Classical Language) होने का दर्जा प्राप्त है। वर्तमान में भारत में 6 शास्त्रीय भाषाएं हैं, आधिकारिक तौर पर यहाँ 22 अनुसूचित भाषाएं हैं। आइये जानते हैं। भारत की शास्त्रीय भाषाएं कौन-कौन सी हैं।

भारत में शास्त्रीय भाषा के वर्गीकरण का आधार क्या है?

2004 में, भारत सरकार ने घोषणा की कि कुछ आवश्यकताओं को पूरा करने वाली भारत की भाषाओं को “शास्त्रीय भाषा” का दर्जा दिया जाएगा, जिसके बाद वर्तमान समय तक, 6 भाषाओं को शास्त्रीय दर्जा दिया गया है और अन्य भाषाओं जैसे बंगाली और मराठी भाषा के लिए लगातार मांग की जा रही है| संस्कृति मंत्रालय द्वारा किसी भी भाषा को ‘शास्त्रीय’ घोषित करने के लिए निम्नलिखित दिशा निर्देश जारी किये गए हैं।

भारत की शास्त्रीय भाषाएं और उनका महत्त्व :-

भारत एक विभिन्न भाषाओं का देश है इन सभी भाषाओं का प्रत्येक वर्ष एक साहित्यिक सम्मेलन ‘ अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन ‘ का आयोजन होता है अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन मराठी लेखकों द्वारा आयोजित किया जाने वाला एक प्रमुख वार्षिकोत्सव सम्मेलन है इसकी स्थापना सन् 1878 में की गई थी।

93 वें ‘ अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन ‘ में मराठी भाषा को शास्त्रीय भाषा के रूप में मान्यता देने की घोषणा की गई इसके तहत एक प्रस्ताव पारित किया गया लेकिन अभी भी मराठी भाषा को शास्त्रीय भाषा के रूप में मान्यता नहीं मिली है।

महान साहित्यकार, पर्यावरणविद् और पादरी ‘ फ्रांसिस द ब्रिटो ‘ इस सम्मेलन की अध्यक्षता करने वाले प्रथम ईसाई थे।

भारत की प्रमुख 6 शास्त्रीय भाषाएं :-

वर्तमान में भारत में 6 शास्त्रीय भाषाएं हैं, भारत में अभी तक 6 भाषाओं में तमिल, संस्कृत, तेलुगू, कन्नड़, मलयालम और ओडिया को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया गया है ।भारत के सभी छ: शास्त्रीय भाषाएं एवं उनके घोषित वर्ष

तमिल – 2004

संस्कृत – 2005

तेलुगु – 2008

कन्नड़ – 2008

मलयालम – 2013

ओडिया – 2014

शास्त्रीय भाषा का दर्जा प्राप्त करने के लिए भारत में आवश्यक मानदंड क्या है? ,:-

हम आपको बताना चाहेंगे कि भारत के संस्कृति मंत्रालय द्वारा किसी भी भाषा को शास्त्रीय भाषा के रूप में मान्यता देने के लिए कुछ जरूरी मानदंड निर्धारित किया गया है इन्हीं मानदंडों के आधार पर किसी भी भाषा को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया जाता है किसी भी भाषा को शास्त्रीय भाषा का दर्जा प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित मानदंडों का होना बहुत आवश्यक है –

1. इतिहास में 1500-2000 वर्षों एतिहासिक अवधि में प्रारंभिक ग्रंथों और पौराणिक ग्रंथों में इस भाषा की मान्यता दर्ज होनी चाहिए।

2. प्राचीन साहित्य/ग्रंथों का एक हिस्सा हो जिसे बोलने वाले लोगों की पीढ़ियों द्वारा एक मूल्यवान विरासत माना जाता हो।

3. शास्त्रीय भाषा और साहित्य आधुनिक भाषा और साहित्य से अलग होने के कारण, शास्त्रीय भाषा और उसके बाद के रूपों या उसकी शाखाओं के बीच एक असमानता भी हो सकता हैं।

4. इन भाषाओं की साहित्यिक परंपरा मौलिक होनी चाहिए और किसी अन्य भाषा समुदाय से उधार नहीं लिया गया हो ।

भारत के शास्त्रीय भाषा भाषाओं से संबंधित कुछ अतिरिक्त जानकारी –

भारत के संस्कृति मंत्रालय ने शास्त्रीय भाषाओं को प्रोत्साहन देने के लिए देश के क‌ई संस्थानों को सूचीबद्ध किया जो शास्त्रीय भाषाओं को समर्पित हैं ये संस्थान निम्नलिखित है –

‘ तेलुगु और कन्नड़ ‘ के लिए :–

वर्ष 2011 में मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने शास्त्रीय भाषाओं के अध्ययन के लिए केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थान (सीआईआईएल) उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना की ।

संस्कृत के लिए :-

राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान, नई दिल्ली महर्षिसांदीपनि राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान, उज्जैन राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ, तिरुपति श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ, नई दिल्ली

तमिल के लिए : –

केंद्रीय शास्त्रीय संस्थान तमिलनाडु (सीआईसीटी), चेन्नई शास्त्रीय

वीडियों देखने के लिए नीचे लिंक पर क्लिक करें।

https://youtu.be/aizwSbDa8MA

शास्त्रीय भाषाओं के लिए भारत में प्रयास :-

केंद्र सरकार द्वारा शास्त्रीय भाषाओं के प्रोत्साहन के लिए कई कदम उठाए गये हैं जिनमें से कुछ निम्नलिखित है –

1. शास्त्रीय भारतीय भाषाओं में प्रतिष्ठित विद्वानों के लिए प्रत्येक वर्ष दो प्रमुख वार्षिक अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार दिये जाते हैं।

2. शास्त्रीय भाषाओं में अध्ययन के लिए क‌ई उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किया गया है।

3. वैश्विक स्तर पर संस्कृति का प्रसार होगा जिससे शास्त्रीय भाषाओं के संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।शास्त्रीय भाषाओं की जानकारी से लोग अपनी संस्कृति को और बेहतर तरीके से समझ सकेंगे तथा प्राचीन संस्कृति और साहित्य से और बेहतर तरीके से जुड़ सकेंगे।

4. केंद्रीय विश्वविद्यालयों, शास्त्रीय भाषाओं के विकास के लिए एक निश्चित संख्या में व्यावसायिक अध्यक्षों की घोषणा की है।

5. आइओ विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) भी इन भाषाओं को बढ़ावा देने के लिए क‌ई अनुसंधान परियोजनाओं को पुरस्कार देता है। संस्कृति मंत्रालय ने कहा है कि UGC ने 2016-17 में 56.74 लाख रुपये और 2017-18 में 95.67 लाख रुपये की धनराशि जारी की।

भारत की शास्त्रीय भाषाओं से संबंधित कुछ पूछें जाने वाले प्रश्नोत्तर –

1. भारत में सर्वप्रथम किस भाषा को शास्त्रीय भाषा का दर्जा कब दिया गया ?

उत्तर :- सर्वप्रथम तमिल भाषा को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया गया तमिल भाषा को वर्ष 2004 में भारत के प्रथम शास्त्रीय भाषा के रूप में मान्यता दी गई।

2. तेलुगु भाषा को किस वर्ष भारत की शास्त्रीय भाषा का दर्जा प्रदान किया गया?

उत्तर :- 2008

3. वर्तमान में भारत सरकार द्वारा कुल कितनी भाषाओं को शास्त्रीय भाषा का दर्जा प्राप्त है ?

उत्तर :- वर्तमान में भारत सरकार द्वारा 6 भाषाओं तमिल, संस्कृत, तेलुगू, कन्नड़, मलयालम और ओडिया भाषा को शास्त्रीय भाषा का दर्जा प्राप्त है।

4. भारत की सबसे पुरानी शास्त्रीय भाषा कौन सी है?

उत्तर :- तमिल

5. वर्ष 2008 में किन दो भाषाओं को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया गया ?

उत्तर :- तेलुगु और कन्नड़

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