मोदी V/S राहुल से बचने की रणनीति उल्टी पड़ी: 2017 में 30 रैलियां कीं, 12 मंदिर गए तो कांग्रेस 77 सीटें जीती; इस बार 17 पर सिमटे

मोदी V/S राहुल से बचने की रणनीति उल्टी पड़ी: 2017 में 30 रैलियां कीं, 12 मंदिर गए तो कांग्रेस 77 सीटें जीती; इस बार 17 पर सिमटे गुजरात में 27 साल से जमे BJP के अंगद पांव को इस बार फिर कोई नहीं डिगा सका । BJP ने 156 सीटें जीतकर पुराने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। इस चुनाव में नरेंद्र मोदी ने मैराथन रैलियां कीं, बड़े-बड़े रोड शो किए। अरविंद केजरीवाल भी चुनाव के दौरान गुजरात में डेरा जमाए रहे, लेकिन राहुल गांधी ने सिर्फ 2 रैली का कैमियो किया ।

राहुल गांधी को लेकर कांग्रेस की चुनावी रणनीति, ये कैसे फेल हुई और आने वाले चुनावों में कांग्रेस को क्या नुकसान हो सकते हैं?

ऊपर दिए गए तीन ग्राफिक्स से साफ जाहिर है कि गुजरात चुनाव से राहुल गांधी गायब रहे। कांग्रेस ने राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को गुजरात चुनाव का सीनियर ऑब्जर्वर बनाया। गुजरात चुनाव के दौरान ही कांग्रेस अध्यक्ष पद का हंगामा हुआ। इसी दौरान सचिन पायलट के साथ गहलोत की लड़ाई खुलकर सामने आई। इसके बावजूद कांग्रेस ने अशोक गहलोत पर भरोसा बनाए रखा।

सोची-समझी रणनीति के तहत गुजरात चुनाव से दूर रहे राहुल गांधी

अशोक गहलोत ने एक इंटरव्यू में बताया कि ‘राहुल गांधी को गुजरात चुनाव प्रचार में शामिल होने की जरूरत नहीं है। वो फिलहाल भारत जोड़ो यात्रा पर फोकस कर रहे हैं, इसलिए गुजरात में मौजूद रहना संभव नहीं है।’ कांग्रेस के एक और सीनियर लीडर मुताबिक कांग्रेस ने सोची समझी रणनीति के तहत गुजरात चुनाव को वन मैन शो नहीं होने दिया। बल्कि कार्यकर्ताओं और लोकल नेताओं को चेहरा बनाया। वरिष्ठ पत्रकार अजय झा लिखते हैं इस वक्त राहुल गांधी का पूरा फोकस 2024 लोकसभा चुनाव पर है। गुजरात मोदी बनाम राहुल का फायदा BJP को मिलता। राहुल ने इसे भांप लिया। वो लोकसभा चुनाव से पहले एक और हार का अपयश नहीं लेना चाहते थे। राजनीतिक विश्लेषक राशिद किदवई के मुताबिक राहुल गांधी खुद को 2024 के लिए प्रोजेक्ट कर रहे हैं। अगर वो गुजरात में शामिल होते तो हार का ठीकरा उनके सिर ही मढ़ दिया जाता। इसलिए जान-बूझकर ये चुनाव लोकल नेताओं के चेहरे पर लड़ा गया।

कांग्रेस की बगैर राहुल गांधी के चुनाव लड़ने की स्ट्रैटजी के फायदे-नुकसान

सीनियर एडिटर शेखर गुप्ता लिखते हैं कि राजनीति बहुत निर्दयी होती है। ये आपको सुस्ताने, अपने जख्म भरने या स्ट्रैटजिक टाइमआउट का मौका नहीं देती। जब आपके विपक्षी मोदी और केजरीवाल जैसे नेता हों तो बिल्कुल भी नहीं। ऐसा नहीं हो सकता कि आप गुजरात चुनाव से ब्रेक लें और 2024 चुनाव में अचानक कमाल कर देंगे। राजनीतिक एक्सपर्ट राशिद किदवई के मुताबिक राहुल गांधी के बगैर राज्यों के चुनाव में कांग्रेस को नुकसान भले हो सकता है, लेकिन इससे कांग्रेस अपने पैर पर खड़े होने की कोशिश कर रही है। राशिद किदवई कहते हैं कि इस स्ट्रैटजी के कुछ फायदे भी हैं। मसलन हिमाचल प्रदेश में भी राहुल गांधी ने कोई रैली नहीं की। वहां क्षेत्रीय नेताओं ने अपनी बात रखी और पूर्ण बहुमत हासिल किया। आने वाले कर्नाटक चुनाव में भी कांग्रेस इसी स्ट्रैटजी पर रहने वाली है। राहुल गांधी अपनी प्रतिष्ठा दांव पर नहीं लगाएंगे।

गुजरात में AAP की घुसपैठ, नेशनल पार्टी: 5 सीटों पर जीते, 35 पर नंबर 2; AAP ने 22% सीटों पर अपनी पैठ बनाई

बात 27 नवंबर 2022 की है। अरविंद केजरीवाल ने भरी प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक कागज पर लिखकर दिया- गुजरात में आम आदमी पार्टी की सरकार बनेगी। ठीक 12 दिन बाद गुरुवार को जब EVM में जमा वोटों का हिसाब हुआ तो उनकी पार्टी 5 सीटों पर सिमट गई। इसके बावजूद अब AAP नेशनल पार्टी बन गई है।

पहली नजर में लगता है कि अरविंद केजरीवाल की बात गलत साबित हुई, लेकिन ये गणित इतना सपाट भी नहीं है। झाड़ू को वोट देने वाले गुजराती 0.62% से बढ़कर 12.9% हो गए। गुजरात की कुल 182 सीटों में से 35 सीटों पर आम आदमी पार्टी दूसरे नंबर पर रही। जीती हुई और दूसरे नंबर की सीटों को मिला लें तो यह संख्या 40 हो जाती है। यानी गुजरात की 22% विधानसभा सीटों पर AAP ने अपना असर छोड़ा है। 2022 की जबरदस्त जीत से पहले पंजाब में भी आम आदमी पार्टी ने 2017 में करीब-करीब इसी तरह घुसपैठ की थी। 2017 के पंजाब चुनाव में आम आदमी पार्टी 20 सीटों पर नंबर एक पर, 27 सीटों पर दूसरे नंबर पर रही थी। ठीक अगले चुनाव में कुल 117 सीटों में से रिकॉर्ड 92 सीटें जीतकर AAP ने सरकार बना ली।

73 सालों में पहली बार मनाया जाएगा Supreme Court का स्थापना दिवस

शनिवार यानी आज 4 फरवरी को पहली बार भारत के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) का स्थापना दिवस मनाया जाएगा।इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सिंगापुर के न्यायाधीश जस्टिस सुंदरेश मेनन को बुलाया गया है।

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