Rajiv Gandhi Foundation : राजीव गांधी फाउंडेशन का लाइसेंस रद्द, विदेशी फंड अब नहीं ले पाएगा कांग्रेस का संगठन

राजीव गांधी फाउंडेशन का FCRA,Foreign Contribution (Regulation) Act (विदेशी योगदान विनियमन अधिनियम) लाइसेंस रद्द कर दिया गया है। केंद्र सरकार की ओर से यह फैसला किया गया है। राजीव गांधी फाउंडेशन पर चीन से फंड लेने का आरोप लगा और यह कहा गया कि इसमें नियमों की अनदेखी हुई है। राजीव गांधी फाउंडेशन पर पहली बार 2020 में आरोप लगे थे।

राजीव गांधी फाउंडेशन का FCRA (विदेशी योगदान विनियमन अधिनियम) लाइसेंस रद्द कर दिया गया है। केंद्र सरकार की ओर से यह फैसला किया गया है। गृह मंत्रालय ने विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम के तहत राजीव गांधी फाउंडेशन और राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट का लाइसेंस रद्द कर दिया गया है।

राजीव गांधी फाउंडेशन पर विदेशी फंडिंग में गड़बड़ी का आरोप लगा है। इसी वजह से राजीव गांधी फाउंडेशन का लाइसेंस रद्द कर दिया गया। जैसा कि इस फाउंडेशन में गांधी शब्द जुड़ा हुआ है तो आप लोगों के मन में यह जरूर आया होगा कि यह फाउंडेशन गांधी परिवार से जरूर जुड़ा हुआ है। और आप बिल्कुल सही भी है।राजीव गांधी फाउंडेशन गांधी परिवार से ही जुड़ा हुआ गैर सरकारी संगठन है। 21 जून 1991 को स्थापित राजीव गांधी फाउंडेशन की अध्यक्ष सोनिया गांधी हैं।

इस समिति में CBI समेत कई अधिकारी थे शामिल :-

इस समिति में केंद्रीय गृह और वित्त मंत्रालयों के साथ-साथ केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के अधिकारी शामिल थे। यह जांच करना अनिवार्य था कि क्या गांधी परिवार और अन्य कांग्रेस नेताओं द्वारा चलाए जा रहे इन ट्रस्टों ने आयकर दाखिल करते समय किसी दस्तावेज में हेरफेर किया या विदेशों से प्राप्त धन का दुरुपयोग और लॉन्ड्रिंग की है।

इसमें अन्य ट्रस्टी डॉ मनमोहन सिंह, राहुल गांधी,सुमन दुबे, प्रियंका गांधी वाड्रा, पी चिदंबरम, मोंटेक सिंह अहलूवालिया, और अशोक गांगुली हैं।गृह मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार जुलाई 2020 में एक कमेटी का गठन किया गया और उसकी रिपोर्ट के आधार पर फाउंडेशन के लाइसेंस को रद्द करने का फैसला हुआ है। BJP इस फाउंडेशन पर लगातार विदेशी चंदे को लेकर आरोप लगाती रही है। राजीव गांधी फाउंडेशन पर चीन से फंड लेने का आरोप लगा और यह कहा गया कि इसमें नियमों की अनदेखी हुई है।

सरकार के इस फैसले पर BJP आईटी सेल के हेड अमित मालवीय ने कहा कि ऐसा लगता है कि यह संस्था इसलिए बनाई गई थी ताकि पैसा उठाया जा सके और गांधी परिवार के सुख-सुविधाओं के लिए उसको इस्तेमाल किया जा सके। इस फाउंडेशन के जरिए कांग्रेस पार्टी देश भर में विभिन्न कार्यक्रमों को आयोजित किया जाता है। माना जा रहा है कि इस फैसले के बाद CBI और ED इस मामले की जांच कर सकती है। केंद्र सरकार की इस कार्यवाही के बाद संगठन विदेशी चंदा नहीं ले पाएगा।

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1991 में की गई थी राजीव गांधी फाउंडेशन की स्थापना :-

बता दें कि राजीव गांधी फाउंडेशन की स्थापना भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए की गई थी। सोनिया गांधी के नेतृत्व में जुलाई 1991 में बैठक हुई और फाउंडेशन के लिए एक प्रस्ताव पारित किया गया था। 1991 में स्थापित राजीव गांधी फाउंडेशन (Rajiv Gandhi Foundation) ने 1991 से 2009 तक विज्ञान और प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, महिलाओं और बच्चों, विकलांगता सहायता आदि सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर काम किया है।

राजीव गांधी फाउंडेशन वेबसाइट के मुताबिक, संगठन ने शिक्षा क्षेत्र में भी काम किया है। जांच के लिए इंटर मिनिस्ट्रियल समिति का गठन हुआ था।उल्लेखनीय है कि गृह मंत्रालय ने राजीव गांधी फाउंडेशन, राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट और इंदिरा गांधी मेमोरियल ट्रस्ट को चीन से फंडिंग के मामले में जांच के लिए इंटर मिनिस्ट्रियल समिति का गठन किया था।

मंत्रालय ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA),आयकर अधिनियम, विदेशी चंदा विनियामक अधिनियम (FCRA) आदि के विभिन्न कानूनी प्रावधानों के उल्लंघन की जांच के लिए इस समिति का गठन किया था।

वीडियो देखने के लिए नीचे लिंक पर क्लिक करें।

https://youtu.be/J-l4yUzudQI

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