रेप से मां बनी 13 साल की बच्ची का दर्द: सहेलियां खेलती थीं, मैं अपना पेट देखकर रोती थी; इस बच्चे को देखना नहीं चाहती

रेप से मां बनी 13 साल की बच्ची का दर्द: सहेलियां खेलती थीं, मैं अपना पेट देखकर रोती थी; इस बच्चे को देखना नहीं चाहती “13 साल की उम्र में रेप होना, गर्भवती होना और फिर बच्चे को जन्म देना… मां बनने का ये सफर मेरे लिए डरावना रहा है। पहले मैंने रेप का दर्द झेला। फिर गर्भवती होने का अभिशाप । खेलने-कूदने की उम्र में मैं घर में कैद हो गई। जहां और बच्चे स्कूल जाया करते थे, वहीं मैं अस्पताल के चक्कर काटती थी। दूसरे का पाप मैं अपना पेट ढक कर छुपाती रही। इस दर्द ने मुझे उम्र से पहले ही बड़ा बना दिया।”

यह दर्द है मिर्जापुर की कक्षा 7 की छात्रा का, जिसके साथ गांव के लड़के ने रेप किया। रेप के 8 महीने बाद पीड़िता ने एक बच्चे को जन्म दिया है। परिवार ने इस मामले में किसी के खिलाफ शिकायत नहीं की है। हॉस्पिटल में डिलीवरी होने के बाद CHC अधीक्षक ने खुद पुलिस को शिकायती पत्र लिखा। जिसके बाद मामले का खुलासा हुआ।

• अब पढ़िए उस नाबालिग पीड़िता का रेप से लेकर बच्चा होने तक का दर्द….

मैं कक्षा 7 की छात्रा थी। मैं भी गांव की दूसरी लड़कियों के साथ स्कूल जाती थी। घर का सारा काम करती थी । शाम को घर के बाहर खेलने जाया करती थी। मगर, एक हादसे ने मेरी पूरी जिंदगी बदल दी। मेरे साथ मेरे गांव के एक लड़के ने ही रेप किया। किसी को कुछ बताने पर उसने जान से मारने की धमकी दी। मुझे भी डर था, ये बात अगर घर में पता चली तो मां-पापा सब कुछ बंद करवा देंगे। मैंने अपने अंदर ही इस दर्द को खत्म कर लिया। मगर, मुझे नहीं पता था यह दर्द जिंदगी भर का बनने वाला है।

1 दिन सोकर उठी तो मुझे अचानक चक्कर आने लगा, फिर उल्टी हुई

मैं सब कुछ भूलने की कोशिश करने लगी। अपने आप को बिजी रखती। मगर, एक दिन मैं सुबह उठी तो चक्कर जैसा महसूस हुआ। मां को बताया, तो उन्होंने खाने के लिए चाय और पराठे दे दिए। मां ने कहा, खाने से ठीक हो जाएगा। मगर, पराठे खाने के कुछ देर बाद मुझे उल्टी होने लगी। मां ने मुझे दवा लाने के लिए कहा, लेकिन मैंने टाल दिया। ऐसा मेरे साथ अक्सर होता, लेकिन मैं उस पर ज्यादा ध्यान नहीं दे रही थी ।

उस रात का दर्द बहुत तेज था, मैं सही से चिल्ला भी नहीं पा रही थी एक रात मैं अपनी मां के साथ सो रही थी। अचानक मेरे पेट में तेज दर्द उठा। मुझे वो दर्द आज भी याद है…. मैं सही से चिल्ला भी नहीं पा रही थी। मां-पापा मुझे अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां डॉक्टर ने मेरा इलाज शुरू किया। जांच में सामने आया कि मैं 3 महीने की प्रेग्नेंट हूं। यह सुनकर मेरी मां मुझे मारने लगी। वह मुझसे पूछने लगी कि ये सब कैसे हुआ। मां बहुत तेज-तेज रोने लगी।

मां ने हाथ जोड़कर बोला- शिकायत न करो, बेटी की जिंदगी खराब हो जाएगी

इसके बाद मैंने अपनी मां को पूरी बात बता दी। मां ने मुझसे कहा, यह सब तूने पहले क्यों नहीं बताया। अस्पताल का स्टाफ यह बात पुलिस को बताने के लिए बोलने लगा, लेकिन मां ने हाथ जोड़कर उन्हें मना कर दिया। मां ने कहा, हमारी बेटी की जिंदगी खराब हो जाएगी। आप लोग ये बच्चा गिरा दो । मगर, अस्पताल के लोगों ने कहा कि हम ऐसा नहीं कर सकते। आपकी लड़की की जान भी जा सकती है।

जिस दर्द से भाग रही थी, वह अब जिंदगी भर के लिए मेरे साथ जुड़ गया था

उसके बाद मां मुझे लेकर घर आ गई। जिस दर्द से मैं भाग रही थी, वह अब जिंदगी भर के लिए मेरे साथ जुड़ गया था। मेरी प्रेग्नेंट होने की बात सामने आने के बाद घर में सब मुझसे कम बात करते। मां किसी काम के लिए नहीं बोलती। मेरा स्कूल का बैग भी मां ने हटा दिया था। मैं बस एक कमरे में रहती थी। पापा के जाने के बाद कमरे से बाहर आती थी। मुझे बहुत शर्म आती थी।

पहले पेट ढक कर मैं अस्पताल जाती थी, पेट बढ़ने पर मां गाड़ी मंगवाने लगी

धीरे-धीरे मेरा पेट बड़ा हो रहा था। तकलीफें बढ़ रही थीं। लोगों की नजरों में मेरा पेट आने लगा था। इस कारण मैंने घर से निकलना बंद कर दिया था। मां ने मुझे बहुत-सी चीजें बताईं, जो मुझे मजबूरी में करना पड़ता था। जब पेट कम निकला था, तब तो अस्पताल पेट ढक कर चली जाती थी। पेट बढ़ा होने के बाद मां गाड़ी मंगवाने लगी।

मेरी सहेलियां गांव में खेलने के लिए मुझे बुलाने आतीं, तो मां मना कर देती थी

मुझे अपने साथ हो रही हर चीज से नफरत होती थी, गुस्सा आता था। गांव में मेरी सहेलियां खेला करती थीं और मैं उनको दूर से देखा करती थी। वो मुझे घर बुलाने आती, तो मां उनको मना कर देती। मेरी जिंदगी में सब खत्म हो गया था। आज इस बच्चे को भी देखने का मन नहीं करता है। गोद में उठाने का मन नहीं करता है। मैं खुद छोटी हूं, फिर एक बच्चे की देखभाल कैसे कर सकती हूं। मुझसे रेप करने वाला आज भी खुलेआम घूम रहा है और मैं रो रही हूं।

73 सालों में पहली बार मनाया जाएगा Supreme Court का स्थापना दिवस

शनिवार यानी आज 4 फरवरी को पहली बार भारत के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) का स्थापना दिवस मनाया जाएगा।इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सिंगापुर के न्यायाधीश जस्टिस सुंदरेश मेनन को बुलाया गया है।

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