श्रद्धा के पिता हर सवाल पर फफक पड़े: बोले- आफताब के घरवालों ने बेटी को मरती मां से नहीं मिलने दिया

श्रद्धा के पिता हर सवाल पर फफक पड़े: बोले- आफताब के घरवालों ने बेटी को मरती मां से नहीं मिलने दिया श्रद्धा का नाम लिया और विकास रुआंसे हो गए। दोहराने लगे कि ‘बेटी के साथ जो उसने किया, उसे भी वैसी ही सजा मिले। मैं नहीं चाहता था कि बेटी मुसलमान के साथ रहे।’

दिल्ली के छतरपुर के एक आम से फ्लैट में रहने वाले आफताब नाम के लड़के पर आरोप है कि उसने श्रद्धा नाम की अपनी लिव इन पार्टनर का न सिर्फ कत्ल किया, बल्कि लाश को 35 टुकड़ों में काटकर जंगल में फेंक दिया। उसने लाश को बाथरूम में काटा, घर के फ्रिज में कटा सिर रखा। और भी ऐसी ही बातें हैं, इतनी वीभत्स कि भरोसा न हो ।

विकास मदान वॉकर श्रद्धा के पिता हैं। मुंबई में रहते हैं। उनसे सवाल करना भी टफ टास्क है। उनका जवाब देना और मुश्किल काम । फिर भी… मैं उन्हें कांपते हाथों से फोन मिलाती हूं, तो उधर से रुआंसी आवाज आती है। पूछती हूं- अब तक की पुलिस जांच से संतुष्ट हैं ?

जवाब: पुलिस ने अब तक जो किया, उससे मैं बहुत संतुष्ट हूं। उन्होंने बहुत अच्छा काम किया है। बस यही चाहता हूं कि आगे भी पुलिस ऐसे ही काम करे।

सवाल: आफताब ने श्रद्धा के साथ क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं, आप अब क्या चाहते हैं?

जवाब: उसने बहुत गलत किया है। मैं चाहता हूं कि जितना बुरा उसने किया है, उतनी बुरी ही सजा उसे मिलनी चाहिए। (जवाब देते हुए लगातार विकास की आवाज कांपती रहती है) हर अगले सवाल से पहले मुझे लगातार गिल्ट फील होती है, एक पिता से ऐसे वक़्त पर सवाल ? क्या ये कम बड़ी क्रूरता है….

सवाल: क्या मां से कभी इस बारे में बात की? सुना है उनके बहुत करीब थी?

जवाब: पता नहीं, मेरे से कभी इस बारे में बात नहीं हुई। मेरी पत्नी भी बहुत ज्यादा कुछ बताती नहीं थी। वो मां थी, जैसा भी हो, वो अपनी बेटी का अच्छा ही सोचती थी। अगर कभी उसकी बेटी से कोई बात हुई भी हो, तो उसने मुझे बताया नहीं । ( श्रद्धा अपनी मां के बहुत करीब थीं और उनसे सबकुछ साझा किया करती थीं। एक साल पहले श्रद्धा की मां की बीमारी से मौत हो गई थी। मां की मौत के साथ ही परिवार के साथ उनका संबंध भी लगभग खत्म हो गया था।) पत्नी का जिक्र आते ही विकास और रुआंसे हो जाते हैं, लेकिन लगातार बोलते रहते हैं। श्रद्धा के बारे में कहते हैं- वो बहुत डीसेंट लड़की थी। जब तक कॉलेज में थी, तब तक उसका नेचर और बिहेवियर बहुत अच्छा था। वो कभी कुछ भी नहीं बोलती थी। जब उसकी इस लड़के (आफताब) से दोस्ती हो गई, तो वो बहुत बदल गई। फिर पता नहीं क्या हुआ कि हमसे भी नाराज और दूर-दूर रहने लगी। मेरी बेटी के साथ जो हुआ, मुझे बहुत बुरा लग रहा है।

हमने इस बारे में श्रद्धा के दोस्त से भी बात की थी। उसने भी कहा था कि आफताब के साथ रिश्ते में आने के बाद श्रद्धा का व्यवहार बदल गया था।

विकास का सब्र टूट जाता है और वे फोन कॉल पर ही रोने लगते हैं, मेरा दिल भी बैठ जाता है। विकास की सिसकते हुए आवाज आती है- मैडम मेरे से नहीं हो रहा, मैं बात नहीं कर पाऊंगा। मैं खुद को समेटकर कहती हूं, बस एक-दो सवाल और पूछ लूं, आपसे बात करने का दो दिन बाद मौका मिला है। वे हां भी नहीं कहते और कॉल भी नहीं काटते। मैं आगे फिर सवाल करती हूं…

सवाल: क्या आपके और भी बच्चे हैं?

जवाब: मेरा एक बेटा और है, जो छोटा है और पढ़ रहा है। श्रद्धा के उससे बहुत अच्छे रिश्ते थे, उससे वो लगातार ही बात करती थी। लेकिन जब वो घर से चली गई थी तो उन दोनों के बीच भी दूरी आ गई थी। आफताब के साथ रिलेशनशिप में आने से पहले वो उसके बहुत करीब थी।

सवाल: जब श्रद्धा चली गई तो फिर क्या हुआ? आपको कभी चिंता नहीं हुई?

जवाब: श्रद्धा जहां रहती थी, उसके बारे में कुछ बताती नहीं थी। तब मुझे शक होता था कि कहीं इसके साथ कुछ बुरा ना हो जाए। वो जहां रहती थी, उस बारे में मुझे पता नहीं चलने देती थी। तब मुझे फिक्र होने लगी कि इसका क्या होगा । मैं सोचता रहता था कि ये कहां रहती है, क्या करती है।

सवाल: उसके लापता होने का पता कैसे लगा?

जवाब: जब वो लापता हो गई थी, तब उसके दोस्त ने बताया था। उससे पहले कभी किसी दोस्त ने श्रद्धा के बारे में हमें नहीं बताया। कभी किसी ने नहीं बताया कि श्रद्धा इतनी तकलीफ में है या कहां रहती है।

सवाल: आपको आफताब पसंद नहीं था? आप उससे मिले थे? जवाब: मैं नहीं चाहता था कि मेरी बेटी किसी मुसलमान के साथ रहे या उससे शादी कर ले। मैंने आफताब को लेकर उसे शुरू से ही मना किया था, लेकिन वो मानी ही नहीं। मैं पहले तो आफताब से कभी नहीं मिला था, लेकिन जब मेरी पत्नी की मौत हुई, उस दौरान वो आता-जाता था।

सवाल: आप कभी आफताब के घरवालों से नहीं मिले?

जवाब: जब श्रद्धा की मां बहुत बीमार थीं, तो हमने उनसे मिलने की कोशिश की थी। आफताब के घरवालों ने ‘मुलाकात नहीं होने दी थी। मेरी पत्नी की मौत के कुछ दिन पहले हमने उसके घर जाकर बात करने की कोशिश की थी। उन लोगों ने हमें श्रद्धा से नहीं मिलने दिया और न ही कुछ बात करने दी । आफताब के भाई ने हमसे कहा कि यहां दोबारा मत आइएगा, उन दोनों से कोई बात नहीं करनी है। आफताब के माता-पिता से पहले मेरी कभी कोई बात नहीं हुई थी। जब श्रद्धा लापता हो गई, तब मेरी उनसे बात हुई, लेकिन उन्होंने मुझे कुछ बताया नहीं । बस इतना ही कहा कि श्रद्धा ठीक है, आफताब से नाराज होकर कहीं चली गई है। वे कह रहे थे कि हम भी कोशिश करेंगे उसे खोजने की, लेकिन मुझे लग रहा था कि वे झूठ बोल रहे थे। उन्हें शायद पता हो आफताब ने क्या किया है। मैं समझ नहीं पाया कि वे ऐसे क्यों बोल रहे हैं।

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