सहारनपुर में संदिग्ध आतंकियों के घर से ग्राउंड रिपोर्ट: भाई बोला- मदरसे में नहीं मिलती थी गद्दारी की शिक्षा; ग्रामीणों ने कहा कोरोना में की थी मदद

सहारनपुर में संदिग्ध आतंकियों के घर से ग्राउंड रिपोर्ट: भाई बोला- मदरसे में नहीं मिलती थी गद्दारी की शिक्षा; ग्रामीणों ने कहा कोरोना में की थी मदद सहारनपुर एक बार फिर सुर्खियों में है। यूपी ATS ने सोमवार को यहां से 8 संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया था, जिनमें से 4 संदिग्ध सहारनपुर के रहने वाले थे। ATS सभी को उठाकर लखनऊ ले आई थी। उनसे पूछताछ कर रही है।

संदिग्धों के पास से पेन ड्राइव, मोबाइल फोन और दस्तावेज मिले थे। ATS ने लुकमान और अलीम की कॉल डिटेल खंगाली थी। इसमें दोनों के बीच करीब 205 बार बात हुई थी। इसी शक पर अलीम और लुकमान को उठाया था। ग्रामीणों ने बताया कि अलीम जो कमाई करता था। उसे सामाजिक कार्यों में खर्च कर देता था। यही कारण है कि उस पर चार लाख रुपए का कर्ज था।

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आतंकी लुकमान जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर सैयद माजरा गांव का रहने वाला है। सहारनपुर-देहरादून हाईवे से करीब 500 मीटर की दूरी पर दो मंजिला घर और मदरसा दार-ए-अरकम है। जहां बच्चे पढ़ाई करते हैं। मदरसे के बराबर में दूसरी बिल्डिंग आतंकी लुकमान के भाई हन्नान का घर है। हन्नान ने बताया, ”लुकमान 19 सितंबर को मुरादाबाद गजरौला गया था। वहां से यूपी ATS ने उठा लिया। इसके बाद पुलिस भी मदरसे में आई थी। पुलिस टीम ने सभी दस्तावेज खंगाले, मगर पुलिस टीम के कुछ मिला नहीं था।”

अब पढ़िए आतंकी लुकमान के भाई हन्नान की जुबानी

हन्नान ने बताया, “22 दिन से भाई लुकमान से कोई भी संपर्क नहीं हुआ है। 10 अक्टूबर को छोटे भाई उस्मान और सोभान लुकमान से मिलने लखनऊ गए हैं। बुधवार को वह लौट कर वापस सहारनपुर आएंगे। तभी पता चलेगा कि मुलाकात हुई या नहीं। “

लुकमान के 7 भाई और 7 बच्चे हैं

हन्नान ने बताया, ”लुकमान सबसे बड़े हैं। उस्मान, सोबान, हसन्नान, अब्दुल हन्नान, अफ्फान, दइयान हैं। हन्नान अपने बड़े भाई लुकमान के साथ मदरसे में बच्चों को मजहबी तालीम देता है। लुकमान के सात बच्चे हैं। जिनमें चार बेटे और तीन बेटियां हैं। सबसे बड़ा बेटा 17 साल का है।”

बोला- मदरसे में नहीं दी जाती थी गद्दारी की शिक्षा

हन्नान ने बताया, “मदरसे में किसी भी प्रकार से देश से गद्दारी की शिक्षा नहीं दी जाती है। मजहबी तालीम के साथ देशभक्ति और भाईचारे की पढ़ाई कराई जाती है। भाई लुकमान भी मदरसे में बच्चों को पढ़ाते हैं। ATS ने उन्हें क्यों उठाया है। यह जानकारी नहीं है। वह निर्दोष है। जांच में सभी सामने आ जाएगा। भाई से अभी तक मुलाकात नहीं हुई। सरकार से चाहते हैं, मामले में निष्पक्ष जांच हो। टेरर फंडिंग के बारे में कुछ नहीं जानते हैं, क्योंकि पुलिस को कुछ नहीं मिला है।”

अलीम की मां बोली- मेरा बेटा बेकसूर, जल्दी से घर आ जाए

आतंकी अलीम जिला मुख्यालय से करीब 12 किलोमीटर दूर सहारनपुर-देहरादून हाईवे पर कैलाशपुर गांव का रहने वाला है। अलीम ने 8वीं तक की पढ़ाई की है। वह लुधियाना से कपड़ा लाकर बेचता है। घर में मां, चार भाई, पत्नी और एक नौ साल की बेटी है। पिता सलीम की पांच महीने पहले मौत हो चुकी है। मां रुखसाना ने कहा, “मेरा बेटा बेकसूर है। आज तक बेटे को किसी पुलिस थाने जाते नहीं देखा है। लेकिन क्या गलतफहमी हुई जो ATS मेरे बेटे अलीम को उठाकर ले गई।” उन्होंने कहा, “सरकार से मांग है, बारीकी से जांच करें और दोषियों को बख्शे नहीं। लेकिन बेकसूरों को पकड़े नहीं। मेरा बेटा तो समाजसेवी है। किसी के भी दुख-दर्द को नहीं देख सकता है। वह देश में आतंकी घटनाओं को अंजाम देगा, वह सपने में भी नहीं सोच सकता है।”

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