सूर्य पर आण्विक विस्फोट का पृथ्वी पर महामारी (कोरोना वायरस) से संबंध है..

सूर्य पर आण्विक विस्फोट का पृथ्वी पर महामारी (कोरोना वायरस) से संबंध है..
उन्नीस सौ बीस में चीजेवस्की नाम के एक रूसी वैज्ञानिक ने इस बात की गहरी खोजबीन शुरू की और पाया कि सूरज पर हर ग्यारह वर्षों में पीरियोडिकली बहुत बड़ा विस्फोट होता है। सूर्य पर हर ग्यारह वर्ष में आणविक विस्फोट होता है। और चीजेवस्की ने यह पाया कि जब भी सूरज पर ग्यारह वर्षों में आणविक विस्फोट होता है तभी पृथ्वी पर युद्ध और क्रांतियों के सूत्रपात होते हैं। और उसके अनुसार विगत सात सौ वर्षों के लम्बे इतिहास में सूर्य पर जब भी कभी ऐसी घटना घटी है, तभी पृथ्वी पर दुर्घटनाएं घटी हैं।

चीजेवस्की ने इसका ऐसा वैज्ञानिक विश्लेषण किया था कि स्टैलिन ने उसे उन्नीस सौ बीस में उठाकर जेल मैं डाल दिया था। स्टैलिन के मरने के बाद ही चीजेवस्की छूट सका। क्योंकि स्टैलिन के लिए तो अजीब बात हो गयी! मार्क्स का और कम्‍युनिस्‍टों का खयाल है कि पृथ्वी पर जो क्रांतियां होती हैं उनका मूल कारण मनुष्य—मनुष्य के बीच आर्थिक वैभिन्य है। और चीजेवस्की कहता हैं कि क्रांतियों का कारण सूरज पर हुए विस्फोट हैं।

अब सूरज पर हुए विस्फोट और मनुष्य के जीवन की गरीबी और अमीरी का क्या संबंध? अगर चीजेवस्की ठीक कहता है तो मार्क्स की सारी की सारी व्याख्या मिट्टी में चली जाती है। तब क्रांतियों का कारण वगीर्य नहीं रह जाता, तब क्रांतियों का कारण ज्योतिषीय हो जाता है। चीजेवस्की को गलत तो सिद्ध नहीं किया जा सका क्योंकि सात सौ साल की जो गणना उसने दी थी इतनी वैज्ञानिक थी और सूरज में हुए विस्फोटों के साथ इतना गहरा संबंध उसने पृथ्वी पर घटने वाली घटनाओं का स्थापित किया था कि उसे गलत सिद्ध करना तो कठिन था। लेकिन उसे साइबेरिया में डाल देना आसान था।

स्टैलिन के मर जाने के बाद ही चीजेवस्की को खूश्चेव साइबेरिया से मुक्त कर पाया। इस आदमी के जीवन के कीमती पचास साल साइबेरिया में नष्ट हुए। छूटने के बाद भी वह चार—छह महीने से ज्यादा जीवित नहीं रह सका। लेकिन छह महीने में भी वह अपनी स्थापना के लिए और नये प्रमाण इकट्ठे कर गया। पृथ्वी पर जितनी महामारियां (संक्रामक बीमारी) फैलती हैं, उन सबका संबंध भी वह सूरज से जोड़ गया है।
सूरज, जैसा हम साधारणत: सोचते हैं ऐसा कोई निष्क्रिय अग्नि का गोला नहीं है, वरन अत्यन्त सक्रिय और जीवन्त अग्‍नि—संगठन है। और प्रतिपल सूरज की तरंगों में रूपांतरण होते रहते हैं। और सूरज की तरंगों का जरा—सा रूपांतरण भी पृथ्वी के प्राणों को कंपित करता है। इस पृथ्वी पर कुछ भी ऐसा घटित नहीं होता जो सूरज पर घटित हुए बिना घटित हो जाता हो।

जब सूर्य का ग्रहण होता है तो पक्षी जंगलों में गीत गाना चौबीस घण्टे पहले से ही बन्द कर देते हैं। पूरे ग्रहण के समय तो सारी पृथ्वी मौन हो जाती है, पक्षी गीत गाना बन्द कर देते हैं और सारे जंगलों के जानवर भयभीत हो जाते हैं, किसी बड़ी आशंका से पीड़ित हो जाते हैं।
बन्दर वृक्षों को छोड्कर नीचे आ जाते हैं। वे भीड़ लगाकर किसी सुरक्षा का उपाय करने लगते है। और एक आश्रर्य कि बन्दर जो निरंतर बातचीत और शोर—गुल में लगे रहते हैं, सूर्य ग्रहण के वक्त इतने मौन हो जाते हैं जितने कि साधु और संन्यासी भी ध्यान में नहीं होते हैं! चीजेवस्की ने ये सारी की सारी बातें स्थापित की हैं।

Bindesh Yadavhttps://untoldtruth.in
CEO& Owner of Untold Truth "Stop worrying what you have been Loss,Start Focusing What You have been Gained"

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