भारत के 8 शास्त्रीय नृत्य के बारे में (About classical dance of India)

भारत के शास्त्रीय नृत्य का इतिहास (History of Indian Classical Dance in Hindi) :-

हमारे भारत में प्राचीन काल से नृत्‍य एक समृद्ध और प्राचीन परम्‍परा रही है। विभिन्‍न कालों की खुदाई, शिलालेखों, राजाओं की वंश परम्‍परा, ऐतिहासिक वर्णन तथा कलाकारों, साहित्यिक स्रोतों, मूर्तिकला और चित्रकला से नृत्‍य के व्‍यापक प्रमाण उपलब्‍ध होते हैं।

पौराणिक कथाएं और दंतकथाएं भी इस विचार का समर्थन करती हुई नजर आती है। कि भारतीय कला के रूप में नृत्‍य ने धर्म तथा समाज में एक महत्‍वपूर्ण स्‍थान बनाया था ।

स्थलों की खुदाई से दो मूर्तियां प्रकाशित हुई, जिसमे एक मोहनजोदड़ों काल की कांसे की मूर्ति और दूसरा हड़प्‍पा काल (2500-1500 ईसा पूर्व) का एक टूटा हुआ धड़ है। यह दोनों मूर्तियां नृत्‍य मुद्राओं की प्रारंभिक सूचक हैं । साहित्‍य में नृत्‍य का पहला संदर्भ वेदों से मिलता है। नृत्‍य का एक संगठित इतिहास महाकाव्‍यों, अनेक पुराण, कवित्‍व साहित्‍य तथा नाटकों से पुनर्निर्मित किया जा सकता है ।

भारत में 12वीं सदी-19वीं सदी तक नृत्‍य के अनेक प्रादेशिक रूप हैं, जिन्‍हें संगीतात्‍मक खेल या संगीत-नाटक कहा जाता है । संगीतात्‍मक खेलों में से वर्तमान शास्‍त्रीय नृत्‍य-रूपों का उदय हुआ है ।

A.भरतमुनि का नाटय-शास्‍त्र के बारे में :-

भरतमुनि का नाटय-शास्‍त्र शास्‍त्रीय नृत्‍य पर प्राचीन ग्रंथ के रूप में उपलब्‍ध है, जो नाटक, नृत्‍य और संगीत कला की एक स्रोत पुस्‍तक है । भरतमुनि के अनुसार इस वेद (नाटय-शास्‍त्र) का विकास ऋृग्‍वेद से शब्‍द, सामवेद से संगीत, यजुर्वेद से मुद्राएं और अथर्ववेद से भाव लेकर किया है ।

आमतौर पर यह स्‍वीकार किया जाता है कि दूसरी सदी ईसा पूर्व- दूसरी सदी ईसवीं सन् नाटय-शास्‍त्र की रचना का समय है । भरतमुनि का नाटय शास्‍त्र को पांचवें वेद के रूप में भी जाना जाता है । भरतमुनि कृत नाट्य शास्त्र को भारतीय शास्त्रीय नृत्य का आधार कहा जाता है। भरतमुनि के नाट्य शास्त्र के अतिरिक्त अभिनय भारती, नाट्य दर्पण, अभिनय दर्पण, भाव प्रकाश आदि पुस्तकें भी लिखी गयीं हैं ।

नाटय-शास्‍त्र में सूत्रबद्ध शास्‍त्रीय परम्‍परा की शैली में नृत्‍य और संगीत नाटक के अनुल्लंघनीय भाग हैं । नाटय की कला में नृत्‍य और संगीत के सभी मौलिक अंशों को भी रखा जाता है। समय के साथ-साथ नृत्‍य अपने आप नाटय से अलग हो गया और स्‍वतंत्र तथा विशिष्‍ट कला के रूप में प्रतिष्ठित हो गया। प्राचीन शोध-निबंधों के अनुसार नृत्‍य में तीन पहलुओं पर विचार किया जाता है- नाटय, नत्‍य और नृत्‍त ।

नाटय में नाटकीय तत्‍व पर प्रकाश डाला जाता है । नृत्‍य विशेष रूप से एक विषय या विचार का प्रतिपादन करने के लिए प्रस्‍तुत किया जाता है । नृत्‍त शुद्ध नृत्‍य है, जहां शरीर की गतिविधियां न तो किसी भाव का वर्णन करती हैं, और न ही वे किसी अर्थ को प्रतिपादित करती हैं । नृत्‍य और नाटय को प्रभावकारी ढंग से प्रस्‍तुत करने के लिए नौरसों का संचार करने में निपुण होना चाहिए। यह नौरस हैं- श्रृंगार, हास्‍य, करूणा, वीर, रौद्र, भय, वीभत्‍स, अदभुत और शांत ।

सभी नृत्‍य शैलियों द्वारा प्राचीन वर्गीकरण- तांडव और लास्‍य का अनुकरण किया जाता है । तांडव पुरूषोचित, वीरोचित, निर्भीक और ओजस्‍वी है । लास्‍य स्‍त्रीयोचित, कोमल लयात्‍मक और सुंदर है । शताब्दियों के विकास के साथ भारत में नृत्‍य विभिन्‍न भागों में विकसित हुआ । इनकी अपनी पृथक शैली ने उस विशेष प्रदेश की संस्‍कृति को ग्रहण किया; प्रत्‍येक ने अपनी विशिष्‍टता प्राप्‍त की । इस प्रकार नृत्‍य कला की अनेक प्रमुख 8 शैलियां बनीं; जिन्‍हें आज भरतनाट्यम, कथकली, कुचीपुड़ी, कथक, मणिपुरी, सत्त्रिया, मोहिनीअट्टम ओर ओडिसी के रूप में जानते हैं ।

वीडियो देखने के लिए नीचे लिंक पर क्लिक करें।

B. भारत के शास्त्रीय नृत्य और सम्बंधित राज्य (Indian Classical Dance and State) :-

क्रम संख्याभारत के शास्त्रीय नृत्य राज्य
1भरतनाट्यमतमिलनाडु
2कत्थकउत्तर भारत
3कथकलीकेरल
4कुचिपुड़ीआंध्र प्रदेश
5ओडिसीउड़ीसा
6मणिपुरीमणिपुर
7मोहिनीअट्टमकेरल
8सत्त्रियाअसम

भारत में 8 प्रमुख शास्त्रीय नृत्य हैं जो संगीत नाटक अकादमी द्वारा मान्यता प्राप्त हैं।

(1) भरतनाट्यम – classical dance of Tamilnadu :-

भरतनाट्यम तमिलनाडु राज्य का शास्त्रीय नृत्य है। यह नृत्य भरत मुनि के नाट्य शास्त्र पर आधारित है। भरतनाट्यम भारत का सबसे प्राचीनतम नृत्य माना जाता है। भरतनाट्यम को सबसे पहले रुकमणी देवी ने किया था। और यह नृत्य मंदिरों में किया जाता था।इस नृत्यकला को चार महत्वपूर्ण तत्वों के द्वारा दर्शाया जाता है।

यह भाव, राग, ताल तथा नृत्य का एक अद्भुत संयोजन है।इन्ही शब्दों से मिलकर भरतनाट्यम शब्द बना है। यह शास्त्रीय नृत्य के सभी पारंपरिक पहलुओं को शामिल करता है।

भरतनाट्यम को करने वाले रुकमणी देवी, यामिनी कृष्णमूर्ति, मृणालिनी साराभाई के नाम प्रमुख है।

(2)कत्थक नृत्य – classical dance of North India :-

कत्थक नृत्य मुख्य रूप से उत्तर भारत में प्रचलित है। कत्थक उत्तर प्रदेश राज्य का classical dance है।भारत में कत्थक की उत्पति भक्ति आन्दोलन के समय में हुई थी। मान्यता यह है कि कत्थक नृत्य भगवन कृष्णा द्वारा किया गया था।

कत्थक शब्द की उत्पति संस्कृत में कथा शब्द से हुई है।इस नृत्य में मुख्य रूप से एक कथा को नृत्य के रूप में दर्शाया जाता है।उत्तर प्रदेश के अलावा यह नृत्य राजस्थान तथा मध्यप्रदेश में भी किया जाता है।

इस शास्त्रीय नृत्य को करने वाले पंडित बिरजू महाराज, लच्छू महाराज, सितारा देवी के नाम प्रमुख है।

हाल ही में पंडित बिरजू महाराज का निधन हो गया। और उन्हें पद्मभूषण से भी सम्मानित किया गया है।

(3)कथकली – classical dance of Kerala :-

कथकली की शुरुवात 17 वीं सदी में केरल राज्य में हुई थी। यह नृत्य विशेष रूप से रामायण तथा महाभारत आधारित होता है।इस राष्ट्रीय नृत्य में अच्छाई तथा बुराई के बीच में युद्ध की कहानी की तरह दर्शाया जाता है।कथकली नृत्य को एक विशेष तरह की पोषक तथा चेहरे में मेकअप लगा कर किया जाता है।

इस नृत्य को करते समय नृतक कभी बोलते नहीं हैं। वह सिर्फ चेहरे की अभिव्यक्ति तथा हाथों के हाव – भाव से नृत्य को प्रदर्शित करते हैं।

कथकली नृत्य को करने वाले कृष्णन कुहरी, कृष्ण नायर, आनंद शिवरामन के नाम प्रमुख हैं।

इसमें हरा रंग विजय तथा लाल रंग हार या बुराई का प्रतीक है।

(4)कुचिपुड़ी- classical dance of Andhra Pradesh :-

कुचिपुड़ी भारत के 8 शास्त्रीय नृत्य में से एक है जो की मुख्या रूप से आँध्रप्रदेश राज्य में प्रचलित है। कुचिपुड़ी की शुरुवात आंध्र प्रदेश के कुचिपुड़ी नामक ग्राम से हुई थी।

पारंपरिक कुचिपुड़ी का प्रदर्शन पुरुष मंडली द्वारा किया गया था। पुरुष अग्निवस्त्र पहनते हैं तथा महिलाएं साड़ी पहन कर इस नृत्य को करती हैं।

कुचिपुड़ी नृत्य को करने वाले यामिनी कृष्णमूर्ति तथा राधा रेड्डी के नाम प्रमुख है।

इस नृत्य को थाल नृत्य, मटका नृत्य भी कहते हैं।

(5)ओडिसी – classical dance of Orissa :-

ओड़िसी भारतीय राज्य ओडिशा की एक शास्त्रीय नृत्य शैली है। ओडिसी नृत्य को पुरातात्विक साक्ष्यों के आधार पर सबसे पुराने जीवित नृत्य रूपों में से एक माना जाता है। अद्यतन काल में गुरु केलुचरण महापात्र ने इसका पुनर्विस्तार किया।ओड़िसी पारंपरिक रूप से प्रदर्शन कला की एक नृत्य-नाटिका शैली है।

इसमें निचले (फुटवर्क), मध्य (धड़) और ऊपरी (हाथ और सिर) के रूप में ज्यामितीय समरूपता और लयबद्ध संगीत प्रतिध्वनि के साथ पूर्ण अभिव्यक्ति और दर्शकों के जुड़ाव के तीन स्रोत हैं।

ओडीसी नृत्य को करने वाले माधवी मुद्गल, केलुचरण महापात्र, तथा संयुक्त पाणिग्रही के नाम प्रमुख हैं।

(6)मणिपुरी – classical dance of Manipur :-

मणिपुरी उत्तरी पूर्व राज्य मणिपुर में किया जाने वाला नृत्य है। यह नृत्‍य भारत के अन्‍य नृत्‍य रूपों से भिन्‍न है। इसमें शरीर धीमी गति से चलता है, सांकेतिक भव्‍यता और मनमोहक गति से भुजाएं अंगुलियों तक प्रवाहित होती है।

यह नृत्‍य रूप 18वीं शताब्‍दी में वैष्णव सम्प्रदाय के साथ विकसित हुआ जो इसके शुरुआती रीति रिवाज और जादुई नृत्‍य रूपों में से बना है। विष्णु पुराण, भागवत पुराण तथा गीत गोविंदम की रचनाओं से आई विषय वस्‍तुएं इसमें प्रमुख रूप से उपयोग की जाती हैं।

Read only – क्या हिग्स बोसोन को गॉड पार्टिकल कहां जाता है? आइए जानते हैं

(7)मोहिनीअट्टम – classical dance of Kerela :-

मोहिनीअट्टम की जड़ों, सभी शास्त्रीय भारतीय नृत्यों की तरह, नाट्य शास्त्र में हैं – यह एक प्राचीन हिंदू संस्कृत ग्रन्थ है जो शास्त्रीय कलाओ पर लिखी गयी हैं।यह परंपरागत रूप से व्यापक प्रशिक्षण के बाद महिलाओं द्वारा किया जाने वाला एक एकल नृत्य है।

मोहिनीअट्टम नृत्य शब्द मोहिनी के नाम से बना है, मोहिनी रूप हिन्दुओ के देव भगवान विष्णु ने धारण इसलिए किया था ताकि बुरी ताकतों के ऊपर अच्छी ताकत की जीत हो सके।

मोहिनीअट्टम नृत्य करने वाली कल्याणी अम्मा, हेमा मालिनी, श्रीदेवी तथा भारती शिवाजी के नाम प्रमुख हैं।

(8)सत्त्रिया – classical dance of Assam :-

सत्त्रिया नृत्य असम का शास्त्रीय नृत्य है। वर्ष 2000 में इस नृत्य को भारत के आठ शास्त्रीय नृत्यों में सम्मिलित होने क गौरव प्राप्त हुआ। यह 8 शास्त्रीय नृत्य में से सबसे नवीनतम शास्त्रीय नृत्य है। इस नृत्य के संस्थापक महान संत श्रीमनता शंकरदेव हैं।सत्त्रिया नृत्य का मूल आमतौर पर पौराणिक कहानियों होती हैं।

यह एक सुलभ, तत्काल और मनोरंजक तरीके से लोगों को पौराणिक शिक्षाओं को पेश करने का एक कलात्मक तरीका था।परंपरागत रूप से, यह नृत्य केवल मठों में ‘भोकोट’ (पुरुष भिक्षुओं) द्वारा, अपने दैनिक अनुष्ठान के एक भाग के रूप में या विशेष त्योहारों को चिह्नित करने के लिए, प्रदर्शन किया जाता था।आज सत्त्रिया नृत्य केवल पौराणिक विषयों तक सीमित नहीं हैं और दोनो पुरुषों और महिलाओं द्वारा मंच पर प्रदर्श्न किया जाता है।

यह नृत्य शंकर देव के अंकियानाट (नाटक) मेजो नृत्य है उसे सत्तरीय नृत्य करते हैं।

भारतीय शास्त्रीय नृत्य से संबंधित प्रश्न :-

1 -कथक नृत्य के जनक कौन है?

लखनऊ घराने के ईश्वरी प्रसाद को कत्थक का जनक माना जाता है।

2- भारत के प्रमुख शास्त्रीय नृत्य कौन कौन से हैं?

भारत के प्रमुख 8 शाश्त्रीय नृत्य हैं। भरतनाट्यम, कत्थक, कत्थकली, कुचिपुड़ी, ओडिसी, मणिपुरी, सत्त्रिया, मोहिनीअट्टम भारत के प्रमुख शास्त्रीय नृत्य हैं।

3- भारत का सबसे पुराना शास्त्रीय नृत्य कौन सा है?

भारत का सबसे पुराना शाश्त्रीय नृत्य भरतनाट्यम है। यह लगभग 2000 साल पूर्व नात्य शाश्त्र पर आधारित है।

4- उत्तर प्रदेश का प्रमुख नृत्य कौन सा है?

उत्तर प्रदेश का प्रमुख शाश्त्रीय नृत्य कत्थक है।

5- तमिलनाडू का मुख्या शाश्त्रीय नृत्य कौन सा है?

तमिलनाडू का प्रमुख शाश्त्रीय नृत्य भरतनाट्यम है।

6- केरल का प्रमुख शाश्त्रीय नृत्य कौन सा है?

कत्थकली और मोहिनिपत्तम केरल के 2 प्रमुख शाश्त्रीय नृत्य हैं।

इसे भी पढ़ें।

ग्लोबल वार्मिंग के क्या कारण है?

विवेकानंद केंद्र दिल्ली शाखा ने मनाया “साधना दिवस” Vivekananda Kendra Delhi Branch Celebrated “Sadha Diwas”

ऋषि सुनक ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री, हमें 200 साल गुलाम रखने वाला ब्रिटेन की सरकार चलाएगा एक भारतीय

(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({});

73 सालों में पहली बार मनाया जाएगा Supreme Court का स्थापना दिवस

शनिवार यानी आज 4 फरवरी को पहली बार भारत के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) का स्थापना दिवस मनाया जाएगा।इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सिंगापुर के न्यायाधीश जस्टिस सुंदरेश मेनन को बुलाया गया है।

मशहूर प्लेबैक सिंगर वाणी जयराम का निधन, हाल ही में पद्म भूषण से किया गया था सम्मानित

मशहूर प्लेबैक सिंगर वाणी जयराम का निधन, हाल ही में पद्म भूषण से किया गया था सम्मानित
Khushboo Guptahttps://untoldtruth.in/
Hii I'm Khushboo Gupta and I'm from UP ,I'm Article writer and write articles on new technology, news, Business, Economy etc. It is amazing for me to share my knowledge through my content to help curious minds.

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

BEST DEALS

Most Popular