26 मई का चंद्र ग्रहण बेहद खास, यहाँ जानें भारत में कितने बजे लगेगा और कहां देगा दिखाई

पहला चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse) लगने वाला है. 26 मई, दिन बुधवार को दोपहर 2 बजकर 17 मिनट से ये चंद्र ग्रहण प्रारंभ हो जाएगा जो की शाम 7 बजकर 19 मिनट तक रहेगा | इसलिए इस दौरान कोई भी प्रकार के शुभ कार्यों की मनाही होती है. साथ ही साथ विशेष सावधानी भी बरतनी होती है. सूतक काल हमेशा पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान ही लगता है जो चंद्र ग्रहण नंगी आंखों से नहीं देखा जा. सकता आप को बता दें कि हमारे भारत के अधिकतर हिस्सों में लगने वाला आज का चंद्र ग्रहण आंशिक होगा मतलब यह एक उपछाया चंद्र ग्रहण की तरह होगा. जो की नंगी आंखों से नहीं दिख पाएगा.

भारत के किन हिस्सों में लगेगा चंद्रग्रहण

भारत के अगरतला, कोलकाता, चेरापूंजी, कूचबिहार, इम्फाल, मालदा, कोहिमा, ईटानगर, गुवाहाटी, पुरी, सिलचर, लुमडिंग और दीघा जैसे शहरों में आंशिक चंद्र ग्रहण दिखने की संभावना है
भारत में चंद्रोदय के ठीक तुरंत बाद ही ग्रहण के आंशिक चरण की समाप्ति हमारे भारत के उत्तरपूर्वी के हिस्सों मे (सिक्किम राज्य को छोड़कर) बाकी पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों तथा ओडिशा के कुछ समुद्री तटीय हिस्से और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह से दिखाई देगा, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में चक्रवात के कारण ग्रहण दिखने की संभावना कम हो सकती है. ग्रहण का आंशिक चरण भारतीय समय के अनुसार दोपहर करीब 3:15 मिनट से शुरू होकर शाम 6:23 मिनट पर खत्म होगा. ग्रहण दक्षिण अमेरिका, उत्तरी अमेरिका, एशिया, ऑस्ट्रेलिया, अंटार्कटिका, प्रशांत महासागर और हिंद महासागर और हिंद महासागर को कवर करने वाले क्षेत्र में भी दिखाई देगा.

चंद्रग्रहण का विस्तार से ज्ञान

पूर्ण रूप से चंद्र ग्रहण तब होता है जब की हमारी पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच मे आ जाती है, जिससे सूर्य से आने वाली किरणें सीधे चंद्रमा तक नहीं पहुंच पाती हैं. इसके विपरीत,यह चंद्र ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है और सूर्य की किरणों को अवरुद्ध करके पृथ्वी पर छाया डालता है इस स्थिति में पृथ्वी की छाया चंद्रमा की रोशनी को ढक लेती है। जिसके कारण सूर्य की रोशनी जब पृथ्वी के वायुमंडल से टकराकर चंद्रमा पर पड़ती हैं तो यह ज्यादा चमकीला हो जाता है।

सुपरमुन ग्रहण व बल्ड मून ग्रहण

हमारे विज्ञान के अनुसार, जब जब भी चंद्रमा पृथ्वी के पीछे पूर्ण रूप से ढक जाता है तब-तब इस पर सूर्य की कोई रोशनी नहीं पड़ रही होती है. ये अंधेरे में चला जाता है. परंतु फिर भी चंद्रमा कभी भी पूर्ण रूप से काला नहीं होता. यह लाल रंग की तरह दिखने लगता है. इसलिए कई बार पूर्ण चंद्र ग्रहण को ब्लड मून भी कहा जाता है इस साल का ये पहला पूर्ण रूपी चंद्र ग्रहण कई मायनों में बेहद दुर्लभ है. ये ग्रहण वाले दिन सुपरमून कहा जाएगा तथा रक्त की तरह लाल रंग का होगा. यह दोनों संयोग लगभग कई सालों में एक बार आता है. वैज्ञानिकों के अनुसार इसे सुपर लूनर इवेंट कहा जाता है. क्योंकि विशेषज्ञों के अनूसार ये सुपरमून भी होगा, मतलब ग्रहण भी होगा और हमारा चंद्रमा खूनी लाल रंग का भी दिखेगा.

पूर्ण व आंशिक चंद्र ग्रहण

चंद्र ग्रहण एक खगोलीय घटना है. जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच में आ जाती है और जब चंद्रमा धरती की छाया से निकलता है तो चंद्र ग्रहण पड़ता है.जब पृथ्वी सूर्य की किरणों को पूरी तरह से रोक लेती है तो उसे पूर्ण चंद्र ग्रहण कहते हैं लेकिन जब चंद्रमा का सिर्फ एक भाग छिपता है तो उसे आंशिक चंद्र चंद्र ग्रहण कहते हैं.
चंद्र ग्रहण हमेशा पूर्णिमा की रात में ही होता है. एक साल में अधिकतम तीन बार पृथ्वी के उपछाया से चंद्रमा गुजरता है, तभी चंद्र ग्रहण लगता है

ग्रहण के दौरान क्या ना करे व क्या करे

तेल लगाना, जल पीना, बाल बनाना, कपड़े धोना और ताला खोलने जैसे कार्य नहीं करने चाहिए।
भोजन करने वाले मनुष्य जितने अन्न के दाने खाता है, उसे उतने सालों तक नरक में वास करना पड़ता है।
सोने से व्यक्ति रोगी होता है।
चंद्र ग्रहण में तीन प्रहर का भोजन करना वर्जित माना जाता है।
दिन पत्ते, तिनके, लकड़ी और फूल आदि नहीं तोड़ने चाहिए।
कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए।

गर्भवती स्त्री क्या ना करे भूलकर

ग्रहण के दौरान गर्भवती स्त्रियों को किसी भी नुकीली चीज का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए जैसे चाकू, कैंची, सूई आदि। शास्त्रों में यह भी कहा जाता है कि न सिर्फ गर्भवती महिलाएं ही यह तक की उनके पति भी इस समय इन चीजों का इस्तेमाल करने से अवस्या बचें। ऐसा माना जाता है कि ऐसा करने से उसके शिशु के अंगों को हानि पहुंच सकती है।

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