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सभी प्राइवेट कंपनियों में RT-PCR टेस्ट हुआ मैंडेट !

WHO की नई गाइड लाइन के हिसाब से अब सभी प्राइवेट कॉम्पनियों मे काम करने वाले लोगों का होगा कोरोना टेस्ट

बिना टेस्ट कराए काम करने की इजाजत नहीं होगा कर्मचारियों की कोरोना जांच पर दुविधा में कंपनियां

भारत में कंपनियां कामकाज शुरू करने की तैयारी में लग गई हैं और वर्कर के वापस काम पर लौटाने के तौर-तरीके तलाशने लगी हैं। कुछ कंपनियों ने इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR)
को पत्र लिखकर मांगे हैं सुझाव क्योंकि वे इस बात को ले कर कन्फर्म नहीं है कि क्या एंटीबॉडी रैपिड टेस्ट बढ़िया तरीके से कारगर साबित होगा ।

सबकी उम्मीदें एंटीबॉडी टेस्ट पर टिकी हुई हैं क्योंकि बहुत से दूसरे देशों में एंटीबॉडी टेस्ट के आधार पर रिस्क फ्री सर्टिफिकेट जारी किए गए
और उसके आधार पर यह मानकर प्रोफेशनल्स को काम पर लौटने के लिए फिट माना गया कि वे वायरस से सुरक्षित हैं। हालांकि इंडिया में एंटीबॉडी टेस्ट के जांच के दायरे में आने से बहुत कन्फ्यूजन हो रहा है।


रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट पर उठे हैं सवाल:-
एक प्राइवेट लैब ओनर ने पहचान जाहिर नहीं किए जाने की शर्त पर कहा, ‘एंटीबॉडी टेस्ट के रिजल्ट सटीक नहीं होते हैं, इसलिए सैंपल की RT-PCR पूंलिंग का सुझाव दिया गया है जो

की सायद विकल्प हो सकता है।
इसलिए कंपनियां इस बात को लेकर निश्चिंत हो सकती हैं कि उनके यहां काम करनेवाले लोग संक्रमण से सुरक्षित हैं या । इस मेथड से एक परिवार या लोकल क्लस्टर के कई लोगों के सैंपल

को एक साथ जाचा जा सकता है।’
मामले के जानकार सूत्रों ने बताया कि पूल टेस्टिंग से जांच का दायरा बढ़ाया जा सकेगा और नतीजों में तेजी लाई जा सकेगी।

RT-PCR टेस्ट की लागत बहोत ज्यादा
रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट के सटीक होने पर सवाल बढ़ने से भारत इंक पसोपेश में पड़ गया है क्योंकि कोरोना वायरस (कोविड 19 ) से कौन बचा हुआ है, यह पता करने के लिए वह एंटीबॉडी टेस्ट का दस्तेमाल करके अपने वर्कर्स की टेस्टिंग करने पर विचार कर रहा था। फिजिकल डिस्टेंसिंग मेंटेन करने के बजाय कुछ कंपनियां इस बात पर भी विचार कर रहा हैं
कि उनके यहां थर्मामीटर से बॉडी टेंपरेचर लेना जरूरी बना दिया जाएगा क्या ।

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