COVID-19 Brain Fog: कोरोना संक्रमण के बाद Brain Fog का खतरा, जानें दिमाग पर कैसे करता है असर

COVID-19 में (कोरोना के बाद) कई लोगों में याददाश्त खोने की समस्या इस समय देखी जा रही है। जिसे Brain Fog का नाम दिया गया है। इससे युवा के साथ साथ बच्चे भी भी प्रभावित हो रहे हैं। इसे भूलने की बीमारी डिमेंशिया से जोड़कर देखा जा रहा है, लेकिन सही मायने में इसे अभी डिमेंशिया कहना उचित नहीं होगा। सिर्फ इसके लक्षण डिमेंशिया की तरह ही होते हैं, लेकिन कोरोना से संक्रमित हुए लोगों में भूलने की परेशानी को चिकित्सा जगत में Brain Fogging नाम दिया गया है।कोरोना ने संक्रमित मरीजों के मस्तिष्क पर भी असर डाला है।

यही वजह है कि 30% मरीजों में न्यूरो(Neuro) से संबंधित लक्षण देखे गए हैं। इसमें सिर दर्द, स्वाद व गंध का पता नहीं चलना, ब्रेन स्ट्रोक, याददाश्त कमजोर होना, गुलियन बेरी सिंड्रोम व मस्तिष्क इंसेफेलाइटिस जैसी बीमारियां शामिल हैं। कोरोना से ठीक हुए लोगों में याददाश्त खोने की परेशानी बहुत सामान्य हो गई है। इस वजह से लोग पूरी नींद नहीं ले पाते। सोते वक्त अचानक नींद टूट जाती है और लोग बातें भूलने लगते हैं।

यह समस्या डिमेंशिया की तरह ही होती है, लेकिन ज्यादातर लोगों में अस्थायी है। इससे पीड़ित व्यक्ति मस्तिष्क में फाग की तरह महसूस करने लगता है, जिससे यादें धुंधली पड़ने लगती हैं। यह कई मरीजों में कोरोना से ठीक होने के बाद तीन से छह माह तक रह सकता है। बाद में यह धीरे-धीरे ठीक हो जाता है। कोरोना से ठीक हुए लोगों में ब्रेन फागिंग व याददाश्त खोने की परेशानी का असल कारण अभी पता नहीं है, लेकिन कोरोना के गंभीर संक्रमण के कारण आक्सीजन की कमी होने से हाइपोक्सिया होता है।

इस वजह से मस्तिष्क में भी आक्सीजन की कमी होती है। इससे मस्तिष्क को नुकसान पहुंचता है और कार्यक्षमता प्रभावित होती है। कुछ मरीजों के मस्तिष्क में ब्लड क्लाट की समस्या होती है। इसके साथ ही स्ट्रोक के मामले भी देखे गए हैं। इसके अलावा मस्तिष्क के अंदर सूजन (ब्रेन इंसेफेलाइटिस) के मामले भी देखे जा रहे हैं। Covid-19 के लॉकडाउन के समय लगभग सभी लोग मास्क का उपयोग अधिक से अधिक करने लगे। जिससे हमारे अंदर ऑक्सीजन की कमी भी देखी गई है। मास्क का उपयोग तभी करें।

जब आप सफर कर रहे हो या कोई ऐसा काम जैसे-धूल मिट्टी वालेकर रहे हैं या कोई केमिकल से संबंधित काम कर रहे हैं तो आप मास्क का उपयोग कर सकते हैं लेकिन हमेशा ही मास्क लगाना नुकसानदायक है। कोरोना वायरस के मरीजों के बीच एक नई बीमारी ने दस्तक दी है. वह है ब्रेन फॉग. ब्रेन फॉग के मरीज का दिमाग धीरे-धीरे काम करना बंद हो जाता है।

Covid-19 से बढ़ सकती है डिमेंशिया की बीमारी :-

Covid-19 के कारण याददाश्त खोने या कमजोर होने की परेशानी अब तक के अनुभव के अनुसार, अस्थायी है। Covid-19 से संक्रमित हुए लोगों में याददाश्त खोने की समस्या डिमेंशिया में बदल पाएगी या नहीं अभी यह कहना जल्दबाजी होगी। हालांकि, कोरोना के गंभीर संक्रमण से पीड़ित हुए बहुत-से मरीज लंबे समय तक शरीर में आक्सीजन की कमी से जूझते रहे हैं, पर यह सब मास्क लगाने की वजह से हुआ है।

ऐसी स्थिति में मस्तिष्क को अधिक नुकसान होने की आशंका रहती है। इसलिए अधिक समय तक आक्सीजन सपोर्ट पर रहने वाले लोगों में आगे चलकर डिमेंशिया या मस्तिष्क की दूसरी बीमारियां बढ़ सकती है।

क्या है Brain Fog? :-

शहर की भागदौड़ वाली लाइफस्टाइल में सिरदर्द, डिप्रेशन, किसी काम करने में मन न लगना आम बात है। अगर यही सब चीज ज्यादा बढ़ जाए तो आपको तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए, क्योंकि आप ‘ब्रेन फॉग’ (Brain Fog) का शिकार हो सकते हैं ब्रेन फॉग में व्यक्ति सामान्य लोगों के मुकाबले कम फोकस्ड हो जाता है।

इसके मरीज में सोचने समझने की शक्ति कम होने लगती है। जिसकी वजह से बात करने में भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. ब्रेन फ्रॉग के मरीज को कोई भी चीज याद रखने में काफी परेशानी होती है।

शरीर और दिमाग पर गहरा असर डालता है ब्रेन फॉग(Brain Fog) :-

ब्रेन फॉग (Brain Fog) शरीर पर कई तरह से असर डालता है इसके मरीज आम लोगों के मुकाबले कम एक्टिव रहते हैं। जाहिर सी बात है जब हमारा Health सही नहीं रहेगा तो हम एक्टिव नहीं रहेंगे। बातचीत करने या किसी भी काम में Focus करने में असमर्थ हो जाता है। ब्रेन फॉग (Brain Fog) को मेंटल फॉग के रूप में भी जाना जाता है।

(1) नींद की कमी :-

ब्रेन फॉग (Brain Fog) के मरीज को नींद नहीं आती है। जिसकी वजह से वह धीरे- धीरे डिप्रेशन और चिड़चिड़ापन के शिकार हो जाते हैं। और इसकी वजह से उनके शरीर में कई तरह के बदलाव होने लगते हैं।

(2) गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल डिसफंक्शन :-

कुछ लोग ब्रेन फॉग की स्थिति में आंतों या पेट में दर्द की शिकायत करते हैं।

(3) सिरदर्द :-

ब्रेन फॉग में सिर में तेज दर्द की शिकायत भी की जाती है। कई बार यह दर्द ऐसा होता है कि आप काम नहीं कर सकते हैं और आपको घर पर रहने की आवश्यकता है।

(4) थकान महसूस होना :-

यह ब्रेन फॉग के सबसे आम शारीरिक लक्षणों में से एक है। थकान तो होगा ही क्योंकि जब नींद नहीं आएगी तो थकान महसूस होने लगता है। इसके मरीज को लगता है कि उनके पास अपने डेली रुटीन को करने के लिए एनर्जी नहीं है. हमेशा थकान महसूस करते हैं।

(5) आंखों में परेशानी :-

ब्रेन फॉग (Brain Fog) से पीड़ित व्यक्तियों को वस्तुओं और चीजों को दूर से देखने पर उन्हें पहचानने में कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है।

(6) भूलने की बीमारी :-

ब्रेन फॉग के मरीज नंबर से लेकर डेली रूटीन की बात भी भूलने लगते हैं। वह बहुत सारी बातें भूलने लगते हैं। जिसकी वजह से उनकी लाइफस्टाइल पूरी तरह से उथल- पुथल हो जाती है।

चिंता, घबराहट व तनाव से भी बन रहा याददाश्त खोने के कारण :-

कोरोना संक्रमण के कारण लोगों में तनाव, घबराहट व चिंता बहुत होती है। इस तरह का फोबिया भी याददाश्त खोने का कारण बन सकता है। इससे बीमारी से पीड़ित लोगों के व्यवहार में बदलाव हो जाता है। उनमें उदासी व दूसरे लोगों से अलग-थलग रहने की समस्या हो सकती है। कुछ लोगों के व्यवहार में अचानक उग्रता आ सकती है। ऐसे लक्षण को नजर अंदाज नहीं करना चाहिए।

ब्रेन फॉग (Brain Fog) से बचने के लिए फल व हरी सब्जियों का करें निरंतर सेवन :-

पौष्टिक आहार का मतलब संतुलित आहार से है। इसके लिए खानपान में फल व हरी सब्जियों का प्रयोग अधिक करना चाहिए। जंक फूड व तली चीजों का ज्यादा इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

खानपान में ऐसी चीजें शामिल होनी चाहिए जिनमें एंटीआक्सीडेंट्स अधिक हों। और आपकी इम्यून सिस्टम मजबूत हो सके। इसके अलावा अल्कोहल के इस्तेमाल से बचना चाहिए। यह सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है। और घातक भी हो सकता है।

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शारीरिक सक्रियता, योग, ध्यान व व्यायाम मददगार :-

कोरोना (Covid-19)के बाद यदि किसी को याद्दाश्त खोने की परेशानी हो रही है तो इससे बचाव के लिए जीवनशैली में बदलाव बहुत जरूरी है। इसके तहत पौष्टिक आहार का प्रयोग और सामाजिक गतिविधियों में खुद को सक्रिय रखना जरूरी है। इसके साथ ही भरपूर नींद लेना चाहिए। योग व ध्यान भी मस्तिष्क की सक्रियता बढ़ाने में मददगार है। इसके अलावा एरोबिक व्यायाम भी करना चाहिए। स्वास्थ्य जांच कराना जरूरी: कोरोना से ठीक होने के बाद अस्पताल से छुट्टी मिलने का मतलब यह नहीं है कि हम पूरी तरह शारीरिक रूप से फिट हो गए। कोरोना से ठीक होने के बाद भी कई लोगों के फेफड़ों में परेशानी देखी जा रही है।

ऐसी स्थिति में सांस लेने में परेशानी होने पर मस्तिष्क में भी आक्सीजन की कमी हो सकती है। इसलिए कोरोना से ठीक होने के बाद स्वास्थ्य जांच कराना जरूरी है। खासतौर पर गंभीर संक्रमण से पीड़ित रहे लोग ठीक होने के बाद भी कुछ समय तक डाक्टर के संपर्क में रहें। इससे कोरोना के बाद की परेशानियों पर जीत हासिल की जा सकती है।

Brain Fog के लक्षण दिखने पर तुरंत करें इलाज :-

मरीजों का इलाज लक्षणों के आधार पर ही किया जाता है। मरीजों को जीवन-शैली बेहतर रखने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा जरूरी दवाएं भी मरीज को दी जाती हैं। यदि किसी को कोई बात जल्दी भूलने लगे तो जल्दी किसी ऐसे अस्पताल में संपर्क करना चाहिए जहां न्यूरोलाजी के डाक्टर मौजूद हों। यदि आस-पास के किसी अस्पताल में न्यूरो के डाक्टर न हों तो मेडिसिन के डाक्टर से भी शुरुआती परामर्श ले सकते हैं। जरूरत पड़ने पर न्यूरोलाजी के विशेषज्ञ से संपर्क कर सकते हैं।

वीडियो देखने के लिए नीचे लिंक पर क्लिक करें।

https://youtu.be/g5MQ4aG5kpI

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