गणेश चतुर्थी विनायक चतुर्थी की कथा 10 सितंबर 2021

भगवान गणेश के जन्म को चिह्नित करने के लिए प्रतिवर्ष गणेश चतुर्थी मनाई जाती है, भगवान गणेश को ज्ञान, लेखन, यात्रा, वाणिज्य और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। उन्हें गजानन, गणेश, गजदंत के रूप में भी संबोधित किया जाता है जो उनके 108 नामों में से हैं।

ऐसा कहा जाता है कि भगवान गणेश की मां, देवी पार्वती ने हल्दी पाउडर से एक लड़के की मूर्ति को उकेरा और उसमें प्राण फूंक दिए, वह जिनको उन्होंने गणेश नाम दिया , एक दिन माता नाहने जाती है और गणेश जी को बोलती है की कोई अंदर न आ पाए और माता वह से चली जाती है

Ganesh Chaturthi this month: Date, shubh muhurat and significance -  Information News


माता के जाने के पश्चात शिव जी वह आते है और शिव जी अनजान होते है इस बात से की गणेश उनके पुत्र है और गणेश जी भी आंजन होते है इस बात से शिवजी गणेश जी से आश्रम के अंदर जाने को बोलते है परन्तु गणेश जी उनकी बात नहीं मानते और क्रोध में आकर शिव जी गणेश जी की उनका शीश उनके दहर से अलग करदेते है और यह सब माता पारवती देख बहुत क्रोधित होती है और शिवजी से उनके पुत्र को जीवित ककर उनका शीश जोड़ने को बोलती है

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बहुत ढूढ़ने के बाद भी उनका शीश नहीं मिलता तो नंदी एक हाथी के बचे का शीश लेकर आता है फिर वही शीश गणेश जी के लाग्या जाता है

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