मध्यप्रदेश के जूनियर डॉक्टर अपनी 6 मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं।

जूनियर डॉक्टरों ने इमरजेंसी सेवाएं भी अब बंद कर दी हैं। जूनियर डॉक्टरों का कहना है कि सरकार द्वारा जो मांगे मानी गई हैं उसे लिखित में नहीं दिया गया जब तक स्ट्राइक जारी रहेगी जब तक वह लिखित में नहीं देते और जूनियर डॉक्टर इसके लिए उग्र आंदोलन कर सड़क पर भी उतरेंगे। जूनियर डॉक्टरों ने कोविड अस्पताल में भी अपनी सेवाएं बंद कर दी हैं।


महाराजा यशवंतराव हॉस्पिटल के बाहर आज जूडा ने प्रदर्शन किया। पूरे प्रदेश में लगभग 2000 से जादा जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर हैं तथा अकेले केवल इंदौर में 450 से जादा डॉक्टर हड़ताल पर हैं जिसमें प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी हॉस्पिटल महाराजा यशवंतराव हॉस्पिटल वा शासकीय डेंटल मेडिकल कॉलेज और गवर्नमेंट कैंसर हॉस्पिटल अस्पतालों में कोरोना के अलावा कोई भी मरीजों का इलाज नहीं किया जा रहा है, वहां के सारे जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर हैं।

सरकार के द्वारा एलोपैथी पद्धति के डॉक्टर ही सर्जरी कर सकते हैं वहीं दूसरी पद्धति के डॉक्टर ये काम नहीं कर सकते इससे मरीजों की जान को भी खतरा है। सरकार के द्वारा जो चार मांगे मानने की बात करी जा रही है वह सरकार लिखित में दें।

इसके पहले भी सरकार पर विश्वास कर अपनी स्ट्राइक खत्म कर वापस काम पर लौटे थे पर अब जूडा का साफ कहना है जब तक सरकार लिखित में हमारी मांगों को मानकर नहीं देती तब तक स्ट्राइक जारी रहेगी और उग्र आंदोलन भी कर सकते हैं।

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