मीडिया एनेस्थेटिक(शरीर को सुन्न करने) की दवा है

जिस तरह यह दवाई लगाने से बॉडी पार्ट्स सुन्न हो जाते है फिर वहां कुछ भी करो,कोई फर्क नहीं पड़ता है।

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सरकारें हर वक़्त भाला लेकर आपके शरीर मे से खून निकलती रहती है लेकिन मीडिया उस स्थान पर यह एनेस्थेटिक दवाई लगाकर सुन्न कर देता है जिससे आपको दर्द का अहसास नहीं होता है।

यदि सरकारे बिना सुन्न किये ,खून निकाले तो आपको बहुत ज्यादा दर्द होगा औऱ आप विद्रोह कर देंगे।

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उदाहरण के लिये
जब बहुराष्ट्रीय कंपनियों को अतिरिक्त फायदे के लिये GST छापा, तो मीडिया ने छोटे व मध्यम व्यापारियों को टैक्स चोर करार दे दिया,ताकि लोगो को GST के लिये तैयार किया जा सके।

विदेशी धनिकों के दबाव में जब lockdown ठोका तो मीडिया ने बड़ी चतुराई को-रोना को lockdown से लिंक करके एनेस्थेटिक दवाई दी।

चाहे देश की सम्पतियों का बेचने को निजीकरण का लेबल लगाकर व सरकारी कर्मचारियों को कामचोर बताकर सार्वजनिक सम्पतियों के बेचान को जायज ठहराया जाता है।

इसी प्रकार हजारो उदाहरण आपको नजर आ जाएंगे यदि आपने एनेस्थेटिक दवाई नहीं ले रखी है।

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सॉल्यूशन:- वोट वापसी दूरदर्शन चैयरमेन व जुरीकोर्ट व #WOIC

जिससे निजी मीडिया के एनेस्थेटिक इंजेक्शन से पब्लिक को दूर किया जा सकें।

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