कोरोनाः टीके की कमी दूर करने के लिए , विदेशों से वैक्सीन आयात कर रहीहै केंद्र सरकार

देश में जारी वैक्सीन की कमी को दूर करने के लिए और वैक्सी नेशन में तेजी लाने के लिए केंद्र सरकार विदेशों से वैक्सीन आयात करने की तैयारी कर रही है. सरकार की कई विदेशी कंपनियों से चल रही बात वैक्सीन खरीदने की
देश में कोरोना संक्रमण के खिलाफ वैक्सीनेशन लोगो को वैक्सीन लगते हुए 5 महीने से जायदा समय हो चूका है
अब तक 20 करोड़ लोगो को वैक्सीन की पहली डोज लग चुकी है सर्कार ने जब से 18 साल से ऊपर लोगो को वैक्सीन लगने के लिए कहा है तब से वैक्सीन की कमी हुई


दिल्ली, पंजाब समेत कई राज्यों ने वैक्सीन की कमी दूर करने के लिए ग्लोबल टेंडर जारी किए थे लेकिन कंपनियों ने ये कहते हुए वैक्सीन देने से मना कर दिया था वो सिर्फ केंद्र सरकार से ही डीलिंग करी है और किसी को वह वैक्सीन नहीं देगी
मिली जानकारी के अनुसार-देश में वैक्सीन की कमी को दूर करने और वैक्सीनेशन में तेजी लाने के लिए विदेशों से वैक्सीन आयात कर सकती है
वैक्सीन को लेकर केंद्र सरकार ने पिछले साल अगस्त में ही नेशनल एक्सपर्ट ग्रुप ऑन वैक्सीन एडमिनिस्ट्रेशन फॉर कोविड​​​​-19 (NEGVAC) का गठन कर दिया था वैक्सीन की उपलब्धता के लिए NEGVAC के जरिए सरकार फाइजर, मॉडर्ना जैसी कई कंपनियों से संपर्क में थी सरकार का जोर न सिर्फ देश में वैक्सीन के प्रोडक्शन को बढ़ाने पर है, बल्कि विदेशी कंपनियों से वैक्सीन आयात करने की कोशिश पर भी है.


मॉडर्ना-फाइजर के भारत आने का रास्ता आसान

भारत के लिए वैक्सीन आयात करना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि हमारे देश की आबादी करीब 1.4 अरब है और कोरोना को फैलने से रोकने के लिए जल्द से जल्द और ज्यादा आबादी को टीका लगवाएं . क्योंकि अभी देश में सिर्फ तीन वैक्सीन को ही मंजूरी मिली है, इसलिए विदेशों से वैक्सीन आयात कर आबादी को वैक्सीन की तैयारी की जा रही है, ताकि कम वक्त में ही ज्यादा से ज्यादा आबादी कोवैक्सीन लगाई जा सके
भारत में इस वक्त तीन वैक्सीन के इस्तेमाल को मंजूरी मिली है. पहली वैक्सीन है कोविशील्ड, जिसे सीरम इंस्टीट्यूट बना रहा है और दूसरी है कोवैक्सीन, जिसे बायोटेक ने आईसीएमआर के साथ मिलकर बनाया है. तीसरी वैक्सीन है स्पुतनिक-V, जिसे इमरजेंसी यूज की मंजूरी मिल गई है. ये रूसी वैक्सीन है, जिसे भारत की डॉ. रेड्डी लैब बना रही है

मई में कोविशील्ड और कोवैक्सीन के 7.92 करोड़ डोज बनाए गए हैं. वहीं, स्पुतनिक-V अभी कुछ प्राइवेट अस्पतालों में लग रही है
देश में 16 जनवरी से वैक्सीनेशन प्रोग्राम शुरू हुआ था. 28 मई तक 133 दिन हो चुके हैं. सरकार अब तक 20.86 करोड़ लोगों को वैक्सीन लगा चुकी है.

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