देश मे FDI के वजह से Repatriation crisis कैसे हो सकते है यह एक साधारण उदाहरण से समझते है।

देश मे FDI के वजह से Repatriation crisis कैसे हो सकते है यह एक साधारण उदाहरण से समजते है।

Repatriation मतलब FDI के जरिये जो डॉलर देश मे आएगा फिर उस पर जो विदेशी कंपनी द्वारा मुनाफा कमाया जाता है, वह मुनाफा वापस डॉलर मे ही देना पड़ता है। Repatriation के वजह से देश की अर्थव्यवस्था एक दिन मे बैठ जाती है ।

कल्पना करो आज देश मे RBI के पास के भी डॉलर नहीं है। फिर देश के महान नेता FDI in फास्ट फूड मे डॉलर का निवेश लाते है, (वडापाव, समोसा, आदि आदि)। MacDonald Company, KFC इत्यादी।
तो कल्पना करिए MacDonald जैसी फास्ट फूड बेचने वाली कंपनी देश मे इस क्षेत्र मे मात्र 1डॉलर का निवेश करती है। यह 1 डॉलर लेकर MacDonald कंपनी RBI के पास जाती है। तो वह MacDonald को आज के हिसाब से डॉलर के बदले 60 रुपये देती है। फिर यह 60 रुपये लेकर MacDonald बाजार मे आती है। (Note – अब RBI के पास सिर्फ 1 ही डॉलर है)

फिर यह कंपनी बाजार से 60 रुपये मे कुछ आधा किलो आलू, एक पाव तेल, पाव की लादी, और पकाने हेतु गॅस खरीद लाती है।

आधा किलो आलू 10 रुपये
एक पाव तेल 20 रुपये
एक पाव की लादी 10 रुपये
LPG गॅस 15 रुपये की लग गयी, फिर भी 5 रुपये बच गए, जो की कोई नौकर रखा, तो उसको दिये (इतनी रोजगारी बढ़ी)।

फिर ऊपर दिये सामग्री मे 10 वडापाव तयार हुए (पढे लिखे गवार उसे बर्गर कहते है), अब देखा जाए तो एक वडापाव जादा से जादा 10 रुपये का होता है। पर MacDonald कंपनी उसे 40 रुपये मे बेचती है। तो 10 वडापाव के हुए (10*40)= 400 रुपये। अब 400 रुपये मेसे 60 रुपये का उसका निवेश हटा देते है (400-60)= 340 रुपये बचते है।

340 रुपये MacDonald कंपनी का शुद्ध रूप से मुनाफा है, जो के कानून न उन्होने उनके देश मे ले जाना चाहिए (आखिर सब लोग मुनाफा कमाने हेतु ही तो यहा आते है)। पर यह 340 रुपये वह उनके देश मे ले नहीं जा सकते, क्यू के भारत के रुपये उनके देश मे किस काम के? तो MacDonald यह 340 रुपये लेकर पहुंच जाता है RBI के पास और RBI से 340 रूपये के बदले डॉलर की मांग करता है।

तो अब RBI को आज के हिसाब से (340/60)= 5.33 डॉलर देने पड़ेगे। पर यहा पर थोड़ी परेशानी है। पहले मैने कहा था कि RBI के पास डॉलर नहीं है। FDI in Fast Food के जरिये RBI के पास आज की तारीख मे सिर्फ 1 डॉलर है। और MacDonald को तो अब 5.33 डॉलर देने है। तो यह बाकी बचे 4.33 डॉलर अब RBI कैसे देती है ?

तो RBI/ सरकार को झक मारकर World Bank से 4.33 डॉलर का कर्जा लेना पड़ता है। यह पर थोड़ी दिक्कत है World Bank किसी भी देश को ऐसे ही कर्जा नहीं देती, कुछ शर्तो पर कर्जा मिलता है।

1) जिस देश को कर्जा चाहिए उस देश को अपने रुपये की किम्मत को डॉलर की तुलना मे घटाना पड़ता है।
2) या तो फिर उस देश को अपने Natural Resources को World Bank के पास गिरवी रखना पड़ता है।
3) या तो फिर आप अपने देश मे और दुसरी विदेशी कंपनी को अपने देश मे व्यापार करने के लिए license दो।

यह सभी शर्ते मानकर RBI अब World Bank से 4.33 डॉलर का याने 340 रुपये का कर्जा लेती है। अब यह कर्जा कोई सरकार नहीं देश की जनता को चुकाना पड़ता है। साथ मे डॉलर की तुलना मे रुपये की कीमत गिरने की वजह से देश की अर्थव्यवस्था एक ही दिन मे बैठ जाती है। फिर सरकार यह कर्जा चुकाने हेतु बाजार मे हर वस्तु पर जादा Tax लगती है, फिर जादा चिजे महंगी हो जाती है। और जादा गरीबी बढ़ती है, लोग भूख से मरते है। वार्षिक बजट का पैसा जो विकास के काम लगाना चाहिए वह अब ज्यादा से ज्यादा कर्जा चुकाने मे लगता है। उसमे भी यह चोर नेता पैसे गायब करते है वह अलग ही हिसाब होता है।

देखिए FDI के 1 डॉलर याने 60 रुपये मिलने के चक्कर मे हमने 340 रुपये Macdonald के मुनाफे के गवाए साथ मे 340 रुपये का कर्जा भी बढ़ा लिया। याने सीधा हिसाब जोड़े तो (340+340)=680 रुपये का मतलब 10.66 डॉलर का हमने खुद का नुकसान करवा लिया । 680 रुपये सीधे गए अमेरिका को, क्योंकि MacDonald भी अमेरिका का और World bank भी अमेरिका का है। यह तो वह बात होती है “आम के आम और गुठली के दाम”।

इसी लिए बराक ओबामा ने कहा “you are the man of action

जिस FDI के निवेश किए हुए डॉलर से देश का विकास होने वाला था। अब वही डॉलर देश को बर्बाद करता है। यह सारा नाटक पिछले 67 सालो से हो रहा है और देश के ऊपर World Bank के अनुसार भारत के ऊपर 334331 million डॉलर का कर्जा है । अगर हर नागरिक पर इसको भाग दे तो हर नागरिक को करीब करीब 15000 रुपये देने पड़ते है, यह सिर्फ एक बैंक से लिए हुए कर्जे की रक्कम है, बाकी बैंक से तो अभी पत्ता नहीं कितना होगा। साधारण हर नागरिक के ऊपर 30,000 रुपये का कर्जा है।

इससे ज्यादा भयावह कहानी दूसरे क्षेत्रो मे होती है। यह तो साधारण उदाहरण से हमने समझा, बाकी की परिस्थिति की आप लोग कल्पना करे।

हम नागरिक को सरकार से अब Non-Repatriable डॉलर निवेश की मांग करनी होगी, उसके लिए देश मे
TCP के प्रस्तावित ड्राफ्ट को गेजेट मे छपवाना होगा।

समाधान = #JuryCourt

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रिक्तभूमिकर

Repatriation मतलब FDI के जरिये जो डॉलर देश मे आएगा फिर उस पर जो विदेशी कंपनी द्वारा मुनाफा कमाया जाता है, वह मुनाफा वापस डॉलर मे ही देना पड़ता है। Repatriation के वजह से देश की अर्थव्यवस्था एक दिन मे बैठ जाती है ।

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